राजस्थान में डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए **₹43,000 करोड़** से ज़्यादा के निवेश प्रस्ताव आए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि बड़े ग्रेजुएट पूल और नई पॉलिसी के दम पर राजस्थान एक अहम डिजिटल हब बने।
राजस्थान में डिजिटल क्रांति की तैयारी
राजस्थान जल्द ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा डेस्टिनेशन बनने वाला है। राज्य सरकार ने डेटा सेंटर्स के लिए ₹43,000 करोड़ से ज़्यादा के निवेश प्रस्तावों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बताया कि ये प्रोजेक्ट राज्य को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और हाई-टेक डिजिटल सर्विसेज का हब बनाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं। सरकार ज़मीन, भरोसेमंद बिजली और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम जैसी सुविधाएं देकर इन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देगी।
कंपनियों की बढ़ी दिलचस्पी
निवेश को लेकर ज़मीन पर काम शुरू हो गया है। ST Telemedia Global Data Centres (STT GDC) ने जयपुर में AI-रेडी एक फैसिलिटी का उद्घाटन किया है, जो राज्य में बड़े डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक अहम कदम है। इसके अलावा, HG Akaya, Nayo Bolt और Ztudium जैसी कंपनियां भी राज्य में बड़े डिजिटल ऑपरेशंस होस्ट करने की संभावना तलाश रही हैं, जिनके लिए काफी बिजली और स्थिर कनेक्टिविटी की ज़रूरत होती है।
'iStart' पहल और इकोनॉमी को नई उड़ान
राजस्थान अपनी पहचान हेरिटेज और टूरिज्म से हटाकर टेक्नोलॉजी-बेस्ड ग्रोथ की ओर ले जाना चाहता है। इस कोशिश का अहम हिस्सा 'iStart' इनिशिएटिव है, जिसने 8,700 से ज़्यादा स्टार्टअप्स को सपोर्ट किया है, 48,000 से ज़्यादा नौकरियां पैदा की हैं और लगभग ₹1,000 करोड़ का प्राइवेट फंड आकर्षित किया है। लोकल इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए, सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए अनिवार्य पहले का अनुभव और सरकारी खरीद में मिनिमम टर्नओवर जैसी पुरानी बाधाओं को हटा दिया है।
निवेशकों को इन बातों पर रखना होगा ध्यान
इन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की सफलता काफी हद तक एग्जीक्यूशन और ज़रूरी संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। डेटा सेंटर्स में बिजली की बहुत ज़्यादा खपत होती है, और उनकी वायबिलिटी अक्सर बिजली की कॉम्पिटिटिव कॉस्ट और ग्रीन एनर्जी की भरोसेमंद सप्लाई पर टिकी होती है। हालांकि, राज्य का बड़ा ग्रेजुएट पूल (जो सालाना 2.5 लाख से ज़्यादा ग्रेजुएट तैयार करता है) एक बड़ी ताकत है, लेकिन AI और डेटा मैनेजमेंट जैसे खास कामों के लिए इस टैलेंट को बनाए रखना एक लंबी चुनौती होगी।
संभावित जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स में काफी लंबा समय लगता है। ज़मीन अधिग्रहण, इंफ्रास्ट्रक्चर कनेक्टिविटी और जटिल रेगुलेटरी अप्रूवल्स के कारण देरी हो सकती है, भले ही सरकार सिंगल-विंडो सिस्टम का वादा कर रही हो। साथ ही, डेटा सेंटर हब को आकर्षित करने के लिए भारतीय राज्यों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जिससे पॉलिसी में बदलाव और राज्य के संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को इन प्रस्तावित डेटा सेंटर्स की असल कमीशनिंग डेट्स और बिजली सप्लाई एग्रीमेंट्स पर क्लैरिटी पर नज़र रखनी चाहिए। ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) और AI के लिए औपचारिक राज्य नीतियों की घोषणा, साथ ही प्रस्तावित AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की क्षमता भी अहम होगी। ₹43,000 करोड़ के प्रस्तावों के लिए विशेष फंडिंग टाइमलाइन पर आने वाले अपडेट्स प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन की तस्वीर साफ करेंगे।
