Quick Commerce: त्योहारी सीजन में नौकरियों की बहार! 40% बढ़ेगी हायरिंग, जानें क्या होगा असर

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AuthorNeha Patil|Published at:
Quick Commerce: त्योहारी सीजन में नौकरियों की बहार! 40% बढ़ेगी हायरिंग, जानें क्या होगा असर

भारत में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इस त्योहारी सीजन में अपनी अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में **35-40%** तक की बढ़ोतरी करने की तैयारी में हैं। इसका मतलब है कि इस सीजन में **1 लाख से 3 लाख** नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। यह कदम डार्क स्टोर नेटवर्क के विस्तार और डिलीवरी की रफ्तार बढ़ाने में मदद करेगा।

क्यों हो रही है बंपर भर्तियां?

क्विक कॉमर्स कंपनियां भारत में त्योहारी सीजन की उम्मीद कर रही हैं और उसी के मुताबिक अपनी हायरिंग बढ़ाने वाली हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल 35-40% ज्यादा लोगों को अस्थायी तौर पर नौकरी पर रखा जाएगा। इसका मुख्य मकसद तेजी से फैलते डार्क स्टोर नेटवर्क को संभालना और त्योहारी सीजन में आने वाले ऑर्डर की भारी डिमांड को पूरा करना है।

सिर्फ डिलीवरी बॉय नहीं, टेक-सेवी लोगों की भी है मांग

सिर्फ डिलीवरी बॉय ही नहीं, बल्कि कंपनियां अब ऐसे लोगों को भी ढूंढ रही हैं जो टेक्नोलॉजी में माहिर हों। वेयरहाउस मैनेजमेंट सिस्टम, इन्वेंटरी का हिसाब-किताब रखने और ऑटोमेटेड पिक-एंड-पैक प्रक्रियाओं को संभालने के लिए टेक-सैवी स्टाफ की बहुत जरूरत है। AI-आधारित व्हीकल रूटिंग और वर्कर एलोकेशन जैसे रोल्स भी अहम हो गए हैं, क्योंकि कंपनियां अपनी लॉजिस्टिक्स को ज्यादा एफिशिएंट बनाना चाहती हैं।

वेतन में बढ़ोतरी और लागत का गणित

इन नई भर्तियों के साथ ही एक बड़ा फाइनेंशियल असर भी होगा। इन अस्थायी फेस्टिव रोल्स के लिए वेतन में 12-22% तक का इजाफा होने की उम्मीद है, जो कि लोकेशन और टेक्निकल स्किल पर निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण बात है। ज्यादा स्टाफ होने से कंपनी के वॉल्यूम और मार्केट शेयर में तो बढ़ोतरी होगी, लेकिन साथ ही ऑपरेशनल कॉस्ट भी बढ़ेगी। टायर-I, टायर-II और टायर-III शहरों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच, वेतन बिल को मैनेज करने के लिए डिलीवरी एफिशिएंसी और ऑर्डर डेंसिटी में सुधार लाना बहुत जरूरी होगा।

एक्सपर्ट्स की राय

स्टाफिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि क्विक कॉमर्स सेक्टर फेस्टिव हायरिंग में अपनी हिस्सेदारी काफी बढ़ा रहा है। Randstad India और TeamLease Services जैसी कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, पिछले सालों की तुलना में फेस्टिव फ्लेक्सिबल हायरिंग में इस सेक्टर का योगदान काफी बढ़ा है। कंपनियां अभी हजारों डार्क स्टोर्स चला रही हैं और अगले 12 से 18 महीनों में इन्हें और बढ़ाने की योजना बना रही हैं। यह इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्ड-आउट उनकी रणनीति का एक अहम हिस्सा है, ताकि वे बड़े पैमाने पर लास्ट-माइल लॉजिस्टिक्स से आगे बढ़कर हाइपरलोकल डिलीवरी टाइम को बेहतर बना सकें।

सेक्टर के सामने चुनौतियां

क्विक कॉमर्स बिजनेस मॉडल तेज एग्जीक्यूशन और कॉम्प्लेक्स सप्लाई चेन मैनेजमेंट पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। फेस्टिव सीजन में बिक्री तो बढ़ेगी, लेकिन ऑपरेशनल रिस्क भी बढ़ जाएगा। पीक डिमांड के दौरान बिना लागत बढ़ाए इतनी हाई-स्पीड डिलीवरी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। इसके अलावा, सेक्टर में इंटेंस कंपटीशन भी है, जिसके चलते अक्सर मार्केटिंग और डिस्काउंटिंग पर भारी खर्च करना पड़ता है। रेगुलेटरी या टैक्स से जुड़े बदलाव, जैसे डिलीवरी चार्जेज पर GST में एडजस्टमेंट, भी कॉस्ट स्ट्रक्चर और कंज्यूमर प्राइसिंग को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे डिमांड पर असर पड़ सकता है।

स्टेकहोल्डर्स के लिए यह देखना अहम होगा कि डार्क स्टोर इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल्ड स्टाफ में बढ़ा हुआ निवेश ऑपरेशनल एफिशिएंसी में तब्दील होता है या नहीं। मार्केट यह देखेगा कि कंपनियां बढ़ती इनपुट कॉस्ट और तेज, भरोसेमंद डिलीवरी देने के कॉम्पिटिटिव प्रेशर के बीच अपने ग्रोथ मोमेंटम को कैसे बनाए रखती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.