Quest Global: ₹37,500 करोड़ वैल्यूएशन पर भारत में लिस्टिंग की तैयारी में बड़ी इंजीनियरिंग फर्म

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Quest Global: ₹37,500 करोड़ वैल्यूएशन पर भारत में लिस्टिंग की तैयारी में बड़ी इंजीनियरिंग फर्म

इंजीनियरिंग, रिसर्च और डेवलपमेंट (ER&D) सेक्टर की दिग्गज कंपनी Quest Global, भारत में स्टॉक मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने सिंगापुर से अपना मुख्यालय भारत शिफ्ट करने के लिए 'रिवर्स फ्लिप' प्रक्रिया शुरू कर दी है। फरवरी 2026 में $4.5 बिलियन (लगभग ₹37,500 करोड़) के वैल्यूएशन के बाद, कंपनी अपने AI-संचालित इंजीनियरिंग मॉडल को पब्लिक मार्केट में लाने की योजना बना रही है।

कंपनी का 'रिवर्स फ्लिप' और IPO का रास्ता

Quest Global, जो इंजीनियरिंग और R&D सेवाओं में एक प्रमुख नाम है, अब भारतीय शेयर बाजार में कदम रखने की योजना बना रही है। इस IPO को संभव बनाने के लिए, कंपनी वर्तमान में एक 'रिवर्स फ्लिप' प्रक्रिया से गुजर रही है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने मूल मुख्यालय को सिंगापुर से भारत स्थानांतरित कर रही है। यह कदम कंपनी को घरेलू IPO लाने के लिए आवश्यक बनाता है, जिसकी उम्मीद अगले 12 से 18 महीनों में की जा रही है।

₹37,500 करोड़ का बढ़ा हुआ वैल्यूएशन

हाल ही में, फरवरी 2026 में Hillhouse Investment Management द्वारा किए गए एक माइनॉरिटी निवेश के बाद, कंपनी का वैल्यूएशन लगभग $4.5 बिलियन (यानी ₹37,500 करोड़ से अधिक) हो गया है। वित्तीय वर्ष 2025 में $1 बिलियन (₹8,300 करोड़) से अधिक के रेवेन्यू और 18 देशों में 21,500 से अधिक कर्मचारियों के साथ, Quest Global इंजीनियरिंग सेवाओं के क्षेत्र में एक मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। कंपनी के सह-संस्थापक और चेयरमैन, अजीत प्रभु, जिनकी कंपनी में 42% हिस्सेदारी है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को अपने संचालन के केंद्र में रखकर कंपनी को आगे बढ़ा रहे हैं।

AI पर दांव: इंजीनियरिंग को मिलेगी नई उड़ान?

अजीत प्रभु का मानना है कि AI इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए खतरे की बजाय एक विकास उत्प्रेरक (growth accelerator) साबित होगा। उनका तर्क है कि जहां AI पारंपरिक IT सेवाओं के दोहराए जाने वाले कामों को बाधित कर सकता है, वहीं यह इंजीनियरिंग के जटिल, डोमेन-विशिष्ट कार्यों को बढ़ा सकता है। कंपनी की रणनीति AI का उपयोग करके उत्पादकता बढ़ाना है, जिससे इंजीनियर अधिक जटिल समस्याओं को कुशलता से हल कर सकें। इसे एक 'कैश फ्लाईव्हील' (cash flywheel) बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जहां उत्पादकता में वृद्धि से प्राप्त पूंजी को इंजीनियरिंग क्षमताओं में और निवेश किया जा सके।

कड़ी प्रतिस्पर्धा और जोखिम

IPO के लिए बाजार में उतरने से पहले, Quest Global को कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ेगा। कंपनी का मुकाबला Tata Elxsi और L&T Technology Services जैसी स्थापित भारतीय कंपनियों के साथ-साथ कई ग्लोबल प्लेयर्स और ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) की इन-हाउस सॉफ्टवेयर टीमों से है। ये प्रतिस्पर्धी भी ग्लोबल ER&D खर्च में अनुमानित वृद्धि का लाभ उठाने के लिए AI और डिजिटल इंजीनियरिंग क्षमताओं में भारी निवेश कर रहे हैं।

इसके अलावा, कंपनी को अपनी कॉरपोरेट संरचना को सिंगापुर से भारत में स्थानांतरित करने में जटिल नियामकीय और कर संबंधी जोखिमों का भी सामना करना पड़ सकता है। 'रिवर्स फ्लिप' प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी या नियामक अनुमोदन में बाधाएं IPO की समय-सीमा को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि कंपनी के पास विविध ग्राहक आधार है, लेकिन ER&D सेक्टर को बिल करने योग्य घंटों पर दबाव और क्लाइंट की बौद्धिक संपदा (intellectual property) पर आधारित इनोवेशन की बदलती मांग जैसी चुनौतियों से निपटना जारी रखना होगा।

निवेशक कंपनी की रेडोमिसाइलिंग प्रक्रिया की प्रगति, AI को वर्कफ़्लो में एकीकृत करते हुए लाभ मार्जिन बनाए रखने की क्षमता, और स्थापित IT दिग्गजों व फुर्तीले AI-केंद्रित स्टार्टअप्स के खिलाफ अपनी बाजार हिस्सेदारी की रक्षा करने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.