Qualcomm ने Apple के साथ अपने वायरलेस पेटेंट लाइसेंसिंग और चिप सप्लाई एग्रीमेंट को **2 साल** के लिए आगे बढ़ा दिया है। इस डील के साथ ही दोनों कंपनियां अब **2027** की शुरुआत तक साथ बनी रहेंगी, जिससे Qualcomm की कमाई में स्थिरता आएगी और Apple के iPhone के लिए मॉडेम टेक्नोलॉजी की सप्लाई सुरक्षित हो गई है।
दुश्मनी से पार्टनरशिप तक का सफर
दोनों दिग्गज कंपनियों के बीच यह तालमेल अप्रैल 2019 में हुए एक बड़े सेटलमेंट के बाद शुरू हुआ था, जिसने पेटेंट और रॉयल्टी को लेकर चल रहे तमाम कानूनी विवादों को खत्म कर दिया था। उस समय हुई 6 साल की डील के बाद अब इस 2 साल के एक्सटेंशन ने दोनों कंपनियों के बीच के रिश्तों को और मजबूती दी है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह अहम?
निवेशकों के नजरिए से देखें तो यह खबर राहत वाली है क्योंकि इससे Qualcomm के रेवेन्यू में स्पष्टता (Visibility) आती है। Apple दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, और एक कॉन्ट्रैक्टेड कस्टमर के तौर पर बने रहने से Qualcomm के टॉप-लाइन ग्रोथ को मजबूती मिलती है। हालांकि इस डील की वित्तीय शर्तें सार्वजनिक नहीं की गई हैं, लेकिन इसने Apple के कंपोनेंट सोर्सिंग को लेकर बनी अनिश्चितता को फिलहाल खत्म कर दिया है।
Apple के सामने क्या है चुनौती?
दूसरी तरफ, यह खबर यह भी साफ करती है कि Apple को अपने इन-हाउस मॉडेम चिप बनाने में अभी भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कंपनी कई सालों से खुद के मॉडेम डेवलप करने की कोशिश कर रही है ताकि बाहरी सप्लायर्स पर निर्भरता कम हो सके। लेकिन iPhone में 5G और भविष्य के कनेक्टिविटी स्टैंडर्ड्स को इंटीग्रेट करना एक जटिल काम है। हर बार जब Apple इस डील को बढ़ाता है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि उनका इन-हाउस प्रोजेक्ट अभी बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन के लिए तैयार नहीं है।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को अब भविष्य में Apple के अपने मॉडेम डेवलपमेंट की प्रोग्रेस पर नजर रखनी चाहिए। जब तक Apple की खुद की टेक्नोलॉजी बड़े स्तर पर कामयाब नहीं हो जाती, Qualcomm के लिए iPhone मेकर का मुख्य टेक्नोलॉजी पार्टनर बने रहना तय है।
