Qualcomm और Arm Holdings के बीच चल रही कानूनी लड़ाई में फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकला है। डेलावेयर की जूरी किसी आम सहमति पर नहीं पहुँच सकी है, जिससे अरबों डॉलर की रॉयल्टी पेमेंट और भविष्य के लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स पर तलवार लटकी हुई है।
कोर्ट में क्या हुआ?
डेलावेयर की फेडरल कोर्ट में चली 5 दिनों की सुनवाई के बाद भी जूरी किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकी है। कोर्ट ने फिलहाल डेलिब्रेशन को रोक दिया है, जिसे अब 13 अक्टूबर, 2026 को दोबारा शुरू किया जाएगा।
विवाद की जड़ क्या है?
इस लड़ाई के पीछे Qualcomm का आरोप है कि Arm ने अपने लाइसेंसिंग एग्रीमेंट्स का उल्लंघन किया है। Qualcomm का कहना है कि Arm ने जानबूझकर चिप-टेस्टिंग टूल्स रोके और 2024 में लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी, ताकि मेटा (Meta Platforms) के साथ Qualcomm की पार्टनरशिप को नुकसान पहुँचाया जा सके।
वहीं, Arm Holdings का तर्क है कि Qualcomm का यह मुकदमा सिर्फ भविष्य की लाइसेंसिंग शर्तों पर मोल-भाव करने की एक सोची-समझी रणनीति है। Arm ने इसे किसी भी तरह के कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन मानने से इनकार किया है।
निवेशकों के लिए क्या है दांव पर?
सबसे बड़ा रिस्क 'रॉयल्टी पेमेंट' का है। Qualcomm कोर्ट से ऐसी राहत मांग रही है जिससे वह 5 साल तक Arm को रॉयल्टी पेमेंट रोक सके। अगर अदालत इसे मंजूरी देती है, तो यह रकम अरबों डॉलर की हो सकती है। जज Maryellen Noreika अभी इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या इस लंबी अवधि के सस्पेंशन वाले प्रोविजन को बरकरार रखा जाए या हटा दिया जाए।
बदलता हुआ सेमीकंडक्टर सेक्टर
यह विवाद सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में आए बड़े बदलावों को दर्शाता है। 2016 में SoftBank Group द्वारा Arm के अधिग्रहण के बाद से, कंपनी का मॉडल एक न्यूट्रल licensor से बदलकर अब अपने ही ग्राहकों के साथ कंपीट करने वाला बन गया है, जो Qualcomm जैसी पुरानी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि यह केवल एक जूरी ट्रायल है; इसके अलावा एक अलग 'बेंच ट्रायल' भी चल रहा है जो भविष्य के आर्किटेक्चर टर्म्स पर फैसला लेगा।
