QRDC का क्रांतिकारी कदम: AI चिप्स में बिजली की जगह रोशनी का इस्तेमाल, बिजली की खपत में भारी कटौती संभव

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AuthorAditya Rao|Published at:
QRDC का क्रांतिकारी कदम: AI चिप्स में बिजली की जगह रोशनी का इस्तेमाल, बिजली की खपत में भारी कटौती संभव

QuantLase Research & Development Center (QRDC) के शोधकर्ता ऐसी AI चिप्स पर काम कर रहे हैं जो बिजली की जगह रोशनी (फोटोन) का इस्तेमाल करेंगी। इसका मकसद AI परफॉरमेंस को बढ़ाना और मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की ऊर्जा खपत और डेटा ट्रांसफर की धीमी गति जैसी समस्याओं को हल करना है।

Detailed Coverage

AI के लिए एनर्जी की नई राह

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल मौजूदा इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की सीमाओं को चुनौती दे रहा है। पारंपरिक चिप्स, जो इलेक्ट्रॉनों के मूवमेंट पर निर्भर करती हैं, बहुत ज्यादा बिजली खाती हैं और परफॉरमेंस में रुकावटें पैदा करती हैं, खासकर जब मेमोरी और प्रोसेसिंग यूनिट्स के बीच डेटा ट्रांसफर की बात आती है। इसी समस्या के समाधान के लिए अब फोटोनिक कंप्यूटिंग पर रिसर्च बढ़ रही है, जिसमें जानकारी को प्रोसेस करने और ट्रांसफर करने के लिए प्रकाश (फोटोन) का इस्तेमाल किया जाता है।

हाइब्रिड कंप्यूटिंग और ऊर्जा दक्षता

QRDC एक खास तरह की फोटोनिक इंटेलिजेंस प्रोसेसिंग यूनिट (PIPU) पर काम कर रहा है। इसे मौजूदा GPU आर्किटेक्चर के साथ मिलकर काम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, न कि उन्हें बदलने के लिए। लाइट-बेस्ड प्रोसेसिंग को इंटीग्रेट करके, ये यूनिट्स डेटा ट्रांसफर के दौरान होने वाली ऊर्जा की बर्बादी की गंभीर समस्या को हल करने का लक्ष्य रखती हैं। QRDC के डायरेक्टर ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन, डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और फोटोनिक इंटेलिजेंस का एक हाइब्रिड अप्रोच ही भविष्य का रास्ता है। यह डिज़ाइन न केवल डेटा प्रोसेसिंग की स्पीड बढ़ाएगा, बल्कि बड़े AI मॉडलों के स्केल को सीमित करने वाली गर्मी और पावर ड्रेन को भी काफी हद तक कम करेगा।

कमर्शियल मैन्युफैक्चरिंग की ओर

लैब रिसर्च से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की ओर बढ़ना फोटोनिक टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए एक अहम कदम है। QRDC में प्रोडक्ट डेवलपमेंट की कमान संभाल रहे डॉ. सलमान अब्दुल्ला, जो पहले Lumentum Technology में डिज़ाइनर रह चुके हैं, की टीम इस समय इंडस्ट्रियल फाउंड्री क्वालिफिकेशन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि इन जटिल चिप्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव हो सके। यह कदम थ्योरेटिकल रिसर्च से हटकर मैन्युफैक्चरिंग की व्यावहारिकता पर जोर देता है, ताकि इन कंपोनेंट्स को मौजूदा कमर्शियल हार्डवेयर इकोसिस्टम के साथ संगत बनाया जा सके।

व्यापक रणनीतिक अनुप्रयोग

AI हार्डवेयर मुख्य फोकस होने के बावजूद, इस अंडरलाइंग टेक्नोलॉजी में दूसरे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल की अपार संभावनाएं हैं। QRDC क्वांटम-सेफ साइबर सिक्योरिटी के क्षेत्र में भी इसके उपयोग की खोज कर रहा है, जैसे कि क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर (Quantum Random Number Generators) और क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (Quantum Key Distribution)। ये तकनीकें भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न होने वाले खतरों से डेटा को सुरक्षित रख सकती हैं। इसके अलावा, ऊर्जा खपत को कम करने की क्षमता बड़े डेटा सेंटरों का प्रबंधन करने वाली सरकारों और उद्योगों के लिए एक बड़ी रणनीतिक प्राथमिकता है। जैसे-जैसे देश और टेक कंपनियां सेमीकंडक्टर इनोवेशन में अपना निवेश बढ़ा रही हैं, फोटोनिक इंटेलिजेंस उन सेक्टर्स के लिए एक संभावित समाधान के रूप में उभर रही है जहां ऊर्जा की खपत ज्यादा होती है, जिनमें मेडिकल डायग्नोस्टिक्स, ऑटोनोमस सिस्टम और साइंटिफिक सुपरकंप्यूटिंग शामिल हैं।

इंडस्ट्री के जानकारों की नज़र QRDC के इंडस्ट्रियल फाउंड्री क्वालिफिकेशन की प्रगति और इन फोटोनिक यूनिट्स को मौजूदा AI इंफ्रास्ट्रक्चर में इंटीग्रेट करने की उनकी क्षमता पर रहेगी। इन चिप्स को बड़े पैमाने पर बाजार में लाने की समय-सीमा एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी, क्योंकि इस टेक्नोलॉजी को वास्तविक दुनिया के हाई-वॉल्यूम डेटा एनवायरनमेंट में पारंपरिक सिलिकॉन-आधारित चिप्स की तुलना में लागत और ऊर्जा का स्पष्ट लाभ साबित करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.