केरल की डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी QBurst ने अपने विस्तार के लिए **$20 करोड़** की भारी-भरकम फंडिंग जुटाई है। कंपनी का लक्ष्य अगले **5 साल** में रेवेन्यू को **3 गुना** करना है, जिसके लिए वह अब बड़े शहरों के बजाय टियर-II और टियर-III शहरों पर फोकस कर रही है।
केरल स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म QBurst ने एक महत्वाकांक्षी 5-वर्षीय विकास योजना तैयार की है। Multiples Alternate Asset Management से प्राप्त $20 करोड़ के निवेश के दम पर कंपनी न केवल अपने रेवेन्यू को तीन गुना करने की तैयारी कर रही है, बल्कि अपने वर्कफोर्स को भी दोगुना करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी अब पारंपरिक IT मेंटेनेंस के बजाय हाई-प्रिसिजन इंजीनियरिंग सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
टियर-II और टियर-III शहरों पर फोकस
कंपनी का नया मॉडल टैलेंट को डीसेंट्रलाइज करने पर आधारित है। दक्षिण भारत के छोटे शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाकर कंपनी न केवल टैलेंट पूल तक पहुंच बना रही है, बल्कि बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महंगे मेट्रो शहरों की लागत और वेतन प्रतिस्पर्धा से भी बच रही है। इसका असर रिटेंशन पर भी दिख रहा है, जहाँ कंपनी का एट्रिशन रेट (Attrition Rate) 8% से नीचे बना हुआ है, जो कि IT इंडस्ट्री के औसत से काफी कम है।
भविष्य की चुनौतियां और अवसर
QBurst अब डेटा एनालिटिक्स, AI-लेड ट्रांसफॉर्मेशन और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे हाई-मार्जिन सेगमेंट पर दांव लगा रही है। हालांकि, रिस्क भी बरकरार है। कंपनी के कुल रेवेन्यू का 55% हिस्सा नॉर्थ अमेरिका से आता है, जिससे वहां की इकोनॉमिक साइकिल में उतार-चढ़ाव होने पर कंपनी के ग्रोथ टारगेट प्रभावित हो सकते हैं।
निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी छोटे शहरों में काम की गुणवत्ता को कैसे बनाए रखती है और अपने क्लाइंट बेस को अमेरिका से बाहर कितना फैला पाती है। प्राइवेट इक्विटी का निवेश यह संकेत देता है कि भविष्य में कंपनी का पब्लिक लिस्टिंग या रणनीतिक बिक्री (Strategic Sale) की ओर झुकाव हो सकता है।
