PwC India और Claroty की नई साझेदारी: इंडस्ट्रियल सिस्टम्स की सुरक्षा अब और मजबूत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PwC India और Claroty की नई साझेदारी: इंडस्ट्रियल सिस्टम्स की सुरक्षा अब और मजबूत

PwC India ने साइबर सिक्योरिटी फर्म Claroty के साथ हाथ मिलाया है। इस पार्टनरशिप का मकसद मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और हेल्थकेयर सेक्टर की मशीनों और कंट्रोल सिस्टम्स को डिजिटल खतरों से बचाना है।

भारत के इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर को साइबर हमलों से बचाने के लिए 7 सितंबर, 2026 को PwC India और Claroty ने एक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। यह गठबंधन PwC की रिस्क मैनेजमेंट एडवाइजरी और Claroty के स्पेशलाइज्ड सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर को एक साथ लाता है।

क्यों है यह जरूरी?

भारत में मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और हेल्थकेयर कंपनियां अपनी कार्यक्षमता (Efficiency) बढ़ाने के लिए इंडस्ट्रियल कंट्रोल सिस्टम्स को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ रही हैं। हालांकि, इन सिस्टम्स को पहले इंटरनेट से अलग रखा जाता था, इसलिए इनमें आधुनिक साइबर सिक्योरिटी फीचर्स का अभाव है। यही वजह है कि ये सिस्टम अब डिजिटल हैकर्स के निशाने पर हैं।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

इस पार्टनरशिप के जरिए कंपनियां अपने नेटवर्क से जुड़े हर डिवाइस पर नजर रख सकेंगी। इसके मुख्य फीचर्स में शामिल हैं:

  • सिक्योरिटी गैप्स की पहचान: पुरानी मशीनों (Legacy equipment) में सुरक्षा की कमी का पता लगाना जिन्हें अपग्रेड करना मुश्किल होता है।
  • अनऑथराइज्ड एक्सेस से सुरक्षा: रिमोटली होने वाली अनधिकृत घुसपैठ को रोकना।

ऑपरेशनल कंटिन्यूटी पर जोर

इंडस्ट्रियल सेक्टर में साइबर हमले का मतलब है प्रोडक्शन का रुक जाना या फिर रैनसमवेयर (Ransomware) का खतरा। यह साझेदारी डिवाइस लेवल पर सुरक्षा सुनिश्चित करके कंपनियों को बिना किसी रुकावट के काम करने में मदद करेगी। जैसे-जैसे भारतीय उद्योग तेजी से डिजिटल हो रहे हैं, सामान्य IT सॉफ्टवेयर से इतर ऐसी स्पेशलाइज्ड सिक्योरिटी की मांग लगातार बढ़ रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बड़ी इंडस्ट्रियल कंपनियां इस फ्रेमवर्क को अपने कामकाज में कितनी प्रभावी ढंग से लागू करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.