Publicis Sapient CEO: AI के दौर में खत्म हुआ 'Mass Hiring' का जमाना

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AuthorAditya Rao|Published at:
Publicis Sapient CEO: AI के दौर में खत्म हुआ 'Mass Hiring' का जमाना

Publicis Sapient के CEO नाइजेल वाज का मानना है कि अब IT सेक्टर में भारी-भरकम वर्कफोर्स वाला पुराना मॉडल आउटडेटेड हो चुका है। AI के आने के बाद कंपनियां अब संख्या के बजाय स्पेशलाइज्ड और रिजल्ट-ओरिएंटेड टीम पर फोकस कर रही हैं।

IT सेक्टर में बड़ा बदलाव

आईटी सर्विसेज का वह दौर अब खत्म होता दिख रहा है, जहां कंपनियों की सफलता उनके हेडकाउंट (Headcount) पर निर्भर करती थी। Publicis Sapient के CEO नाइजेल वाज के अनुसार, आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के पूरे इकोनॉमिक्स को बदल दिया है। अब कंपनियां बिलिएबल आवर्स के पीछे भागने के बजाय ऐसे 'आउटकम-बेस्ड' मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जहां मैनपावर से ज्यादा दक्षता और टेक्निकल एक्सपर्टीज की कीमत है।

'स्पेशल फोर्स' जैसी टीमें

वाज का विजन है कि भविष्य में टेक्नोलॉजी टीमें 'एलीट स्पेशल फोर्स' की तरह काम करेंगी। AI टूल्स अब कोडिंग और पुराने सिस्टम के आधुनिकीकरण (Modernization) का काम तेजी से कर रहे हैं, जिससे दशकों का काम अब सालों में पूरा हो रहा है। इससे उन लार्ज-स्केल लेबर मॉडल की जरूरत खत्म हो गई है, जो कभी आईटी कंपनियों के रेवेन्यू का मुख्य आधार थे।

Publicis Groupe का दमदार प्रदर्शन

Publicis Sapient की पैरेंट कंपनी Publicis Groupe, जो Euronext Paris पर लिस्टेड है, इस बदलाव का लाभ उठा रही है। कंपनी ने 2026 की पहली छमाही में 17.5% का रिकॉर्ड ऑपरेटिंग मार्जिन दर्ज किया है और पूरे फिस्कल ईयर के लिए ऑर्गेनिक ग्रोथ गाइडेंस को 4.5% से 5% तक बढ़ा दिया है। यह इस बात का सबूत है कि हाई-वैल्यू सर्विसेज की ओर झुकाव कंपनियों के प्रॉफिट को बनाए रखने में मददगार है।

भारतीय IT सेक्टर पर चुनौती

भारत में सक्रिय 2,100 से ज्यादा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अब आईटी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। बड़ी कंपनियां अब अपना कोर रिसर्च और टेक्नोलॉजी का काम इन-हाउस ही कर रही हैं, जिससे थर्ड-पार्टी आईटी फर्मों पर दबाव बढ़ गया है।

निवेशकों के लिए रिस्क और फैक्टर्स

हालांकि यह रणनीति मार्जिन सुधारने के लिए सही है, लेकिन इसमें रिस्क भी कम नहीं हैं। मैक्रो-इकोनॉमिक अस्थिरता के कारण क्लाइंट्स बजट में कटौती कर सकते हैं या प्रोजेक्ट्स में देरी कर सकते हैं। निवेशकों को अब यह ट्रैक करना होगा कि क्या बड़ी आईटी कंपनियां अपने मार्जिन को तब भी बचा पाएंगी, जब वे पारंपरिक वॉल्यूम-बेस्ड मॉडल से पूरी तरह बाहर निकलेंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.