Prosus ने FY26 के लिए भारत में **13%** की बढ़ोतरी के साथ **$781 मिलियन** का रेवेन्यू दर्ज किया है। PayU, Prosus की फिनटेक कंपनी, ने पूरे साल के लिए **$18 मिलियन** का एडजस्टेड EBITDA प्रॉफिट कमाया है, जो इसकी पिछली घाटे की स्थिति से एक बड़ा बदलाव है।
Prosus, जो एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी इन्वेस्टर है, ने अपने भारतीय बिज़नेस के लिए FY26 के नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी का रेवेन्यू 13% बढ़कर $781 मिलियन पर पहुँच गया है। इस बढ़ोतरी में सबसे बड़ा योगदान PayU इंडिया का रहा, जिसने पहली बार पूरे साल के लिए एडजस्टेड EBITDA में $18 मिलियन का प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में $25 मिलियन का घाटा हुआ था।
PayU की मुनाफे की ओर वापसी
PayU की इस कामयाबी का मुख्य कारण उसकी बिज़नेस स्ट्रैटेजी में बदलाव है। कंपनी ने कम मार्जिन वाले मर्चेंट पोर्टफोलियो से हटकर ज़्यादा वैल्यू वाले सॉफ्टवेयर और फाइनेंशियल सर्विसेज़ पर फोकस किया। इस रणनीति से कंपनी का पेमेंट बिज़नेस बढ़ा है और ऑपरेशनल कॉस्ट पर भी नियंत्रण रहा।
कंपनी ने वैल्यू-एडेड सर्विसेज़ (VAS) जैसे फ्रॉड रिस्क, ऑथेंटिकेशन और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर पर ज़्यादा ध्यान दिया, जिससे रेवेन्यू स्ट्रीम डाइवर्सिफाई हुई। ये हाई-मार्जिन सर्विसेज़ अब PayU के पेमेंट बिज़नेस का एक अहम हिस्सा हैं। इसके अलावा, कंपनी के क्रेडिट डिवीज़न ने भी $6 मिलियन का एडजस्टेड EBITDA प्रॉफिट कमाया है। PayU ने पूरे साल में $90 बिलियन का टोटल पेमेंट वॉल्यूम (TPV) प्रोसेस किया, जो पिछले साल के मुकाबले 15% ज़्यादा है।
Swiggy के क्विक कॉमर्स का असर
जहां PayU ने अपनी फाइनेंशियल हेल्थ सुधारी है, वहीं Prosus के भारतीय पोर्टफोलियो की दूसरी कंपनियों जैसे Swiggy, Meesho, Rapido और ixigo पर मिले-जुले असर दिखे। Swiggy की फूड डिलीवरी बिज़नेस में जोरदार ग्रोथ देखने को मिली, जिसमें एडजस्टेड EBITDA दोगुना हुआ और ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू (GOV) 19% बढ़ी।
हालांकि, Swiggy के Instamart सर्विस के ज़रिए क्विक कॉमर्स में आक्रामक विस्तार के लिए भारी निवेश की ज़रूरत पड़ी। Instamart का GOV पिछले साल की तुलना में 105% बढ़ा, जिसके लिए 1,136 डार्क स्टोर्स का नेटवर्क बनाया गया। इस तेज़ विस्तार ने मार्केट शेयर बढ़ाने में मदद की, लेकिन भारी शुरुआती खर्च Prosus की ओवरऑल प्रॉफिटेबिलिटी पर भारी पड़ा। Instamart का कॉन्ट्रिब्यूशन मार्जिन थोड़ा सुधरकर नेगेटिव 2.5% हो गया (पहले नेगेटिव 4.6% था), लेकिन यह सेगमेंट अभी भी निवेश के दौर से गुज़र रहा है, जिसका असर ग्रुप के बॉटम लाइन पर दिख रहा है।
बिज़नेस स्ट्रैटेजी
Prosus अपने भारतीय पोर्टफोलियो कंपनियों को और ज़्यादा इंटीग्रेट करने पर काम कर रही है। PayU अब Swiggy, Meesho और ixigo जैसी कंपनियों के लिए पेमेंट और क्रेडिट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइड कर रही है। इस क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म तालमेल का मकसद कस्टमर एक्विजिशन कॉस्ट कम करना और इकोसिस्टम में ट्रांजेक्शन वॉल्यूम बढ़ाना है।
निवेशकों के लिए, PayU की बढ़ती प्रॉफिटेबिलिटी और क्विक कॉमर्स के लिए ज़रूरी कैपिटल का कॉम्बिनेशन भारतीय कंज्यूमर इंटरनेट सेक्टर के एक कॉमन ट्रेंड को दर्शाता है। कंपनियां अब 'ग्रोथ एट ऑल कॉस्ट' के दौर से निकलकर ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जहां कुछ सेगमेंट्स को कैश जेनरेट करना होगा, जबकि कुछ में अभी भी बड़े पैमाने पर निवेश जारी रहेगा।
निवेशकों के लिए ट्रैक करने योग्य बातें
आगे चलकर, PayU के मार्जिन की सस्टेनेबिलिटी पर मुख्य फोकस रहेगा। निवेशक यह देखेंगे कि क्या हाई-मार्जिन सॉफ्टवेयर सर्विसेज़ की ओर यह बदलाव मार्केट में दूसरी फिनटेक कंपनियों से मुकाबला कर पाएगा। इसके अलावा, पूरे पोर्टफोलियो के लिए, क्विक कॉमर्स सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी की राह पर नज़र रखना अहम होगा। कंपनी की मार्केट शेयर ग्रोथ और यूनिट इकोनॉमिक्स के बीच संतुलन बनाने की क्षमता इकोसिस्टम स्ट्रैटेजी का अंतिम टेस्ट होगी।
