ChrysCapital समर्थित एनालिटिक्स फर्म ProHance अब भारतीय IT सेक्टर में टाइम-ट्रैकिंग से आगे बढ़कर AI उपयोग को मापने पर जोर दे रही है। हालांकि, कर्मचारियों की प्राइवेसी और इन-हाउस समाधानों का खतरा इसकी राह में बड़ी चुनौतियां हैं।
भारत की प्रमुख IT कंपनियां हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को अपना रही हैं, जिससे वर्कफोर्स एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म्स की मांग तेजी से बढ़ी है। बेंगलुरु स्थित ProHance इस क्षेत्र में एक प्रमुख नाम बनकर उभरी है। ये प्लेटफॉर्म अब केवल घंटों का हिसाब नहीं रखते, बल्कि यह भी ट्रैक करते हैं कि कर्मचारी कौन से एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे हैं और काम के नतीजे कैसे आ रहे हैं।
सर्विलांस से AI गवर्नेंस तक का सफर
अब कंपनियां केवल टाइम-ट्रैकिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह देख रही हैं कि नई टेक्नोलॉजी पर किया गया खर्च (CapEx) कितना वसूल हो रहा है। ProHance ने अब 'AI एडॉप्शन इंडेक्स' लॉन्च किया है, जो यह बताता है कि कर्मचारी AI एजेंट्स का उपयोग कितनी प्रभावी ढंग से कर रहे हैं। यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है, जिसका मकसद 'शैडो AI' रिस्क को रोकना और अनुपालन (Compliance) सुनिश्चित करना है।
IT सेक्टर के निवेशकों के लिए ये टूल्स ऑपरेशनल एफिशिएंसी को मापने का एक पैमाना हैं। जब TCS, Cognizant, या Wipro जैसी बड़ी कंपनियां इन प्लेटफॉर्म्स को अपनाती हैं, तो उनका लक्ष्य रिसोर्स एलोकेशन में पारदर्शिता लाना और मार्जिन पर दबाव होने पर खर्चों को ऑप्टिमाइज करना होता है।
चुनौतियां और रिस्क
इतने फायदों के बावजूद, इस तरह के सॉफ्टवेयर के सामने दो बड़े रिस्क हैं। पहला, कर्मचारियों का विरोध। बारीक ट्रैकिंग से कर्मचारियों को 'इंट्रूसिव सर्विलांस' महसूस हो सकता है, जिससे कंपनी का कल्चर खराब होने और एट्रिशन (Attrition) बढ़ने का डर रहता है।
दूसरा बड़ा रिस्क 'कमोडिटाइजेशन' का है। चूंकि IT कंपनियां खुद टेक्नोलॉजी में माहिर हैं, इसलिए वे भविष्य में अपना खुद का इन-हाउस मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर सकती हैं। यदि कंपनियां लाइसेंसिंग के बजाय अपना सॉफ्टवेयर बनाना बेहतर समझती हैं, तो ProHance जैसे वेंडर्स की मार्केट शेयर और प्राइसिंग पावर पर दबाव पड़ सकता है। फिलहाल ProHance अपने जटिल आर्किटेक्चर के दम पर अपनी पकड़ बनाए हुए है, लेकिन आने वाले समय में AI गवर्नेंस के मानक ही तय करेंगे कि कौन सी कंपनी इस रेस में टिक पाएगी।
