AI स्टार्टअप PrismML ने Bonsai 2 27B मॉडल पेश किया है, जो महज **5.9 GB** मेमोरी में लोकल डिवाइस पर चलेगा। यह क्लाउड-आधारित AI पर निर्भरता कम कर डेटा प्राइवेसी और स्पीड को बूस्ट करेगा।
अब पर्सनल डिवाइस पर होगा AI का राज
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टार्टअप PrismML ने एक नई क्रांति की शुरुआत की है। कंपनी का नया मॉडल, Bonsai 2 27B, क्लाउड सर्वर की भारी-भरकम लागत और जटिलता को खत्म कर इसे सीधे आपके स्मार्टफोन और PC पर लाने का दावा करता है। Qwen3.8 आर्किटेक्चर को कंप्रेस करके इसका साइज केवल 5.9 GB तक सीमित कर दिया गया है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
PrismML ने 'टर्नरी वेट कंप्रेशन' (ternary weight compression) तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसमें डेटा वैल्यू को 3 स्टेट्स—पॉजिटिव वन, नेगेटिव वन या जीरो—में बदल दिया जाता है। कंपनी का दावा है कि इस प्रक्रिया के बाद भी मॉडल अपनी 98% ओरिजिनल एक्यूरेसी बनाए रखता है।
बाजार पर इसका असर और निवेश का एंगल
यह बदलाव सेमीकंडक्टर और हार्डवेयर कंपनियों के लिए गेम-चेंजर हो सकता है। फिलहाल कंपनियां क्लाउड API के जरिए डेटा प्रोसेसिंग पर भारी खर्च करती हैं। लोकल AI आने से ये लागत कम होगी। यह तकनीक उन कंपनियों के लिए फायदेमंद है जो NPU (न्यूरल प्रोसेसिंग यूनिट्स) पर काम कर रही हैं, जैसे कि Qualcomm, Intel, और Apple।
चुनौतियां भी कम नहीं
निवेशकों को सिक्के के दूसरे पहलू को भी देखना होगा। लोकल AI चलाने से डिवाइस के प्रोसेसर और बैटरी पर काफी लोड बढ़ता है। थर्मल थ्रॉटलिंग (डिवाइस का गर्म होकर धीमा होना) एक बड़ी समस्या हो सकती है। साथ ही, बहुत जटिल कामों में ये कंप्रेस्ड मॉडल, क्लाउड-बेस्ड बड़े मॉडल्स की तुलना में कभी-कभी तर्कसंगत गलतियां कर सकते हैं।
आगे की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और स्मार्टफोन कंपनियां इस 'लाइटवेट AI' को कितनी जल्दी अपने ऑपरेटिंग सिस्टम का हिस्सा बनाती हैं, जो आने वाले समय में क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स के प्रभुत्व को कड़ी चुनौती दे सकता है।
