2026 की शुरुआत में प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में **16%** का भारी उछाल आया है। इसके चलते अब भारतीय ग्राहक महंगे फोन खरीदने के बजाय मंथली सब्सक्रिप्शन और लीजिंग प्लान्स को तरजीह दे रहे हैं, जिससे कंपनियों को एक नया रिकरिंग रेवेन्यू मॉडल मिल रहा है।
स्मार्टफोन बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, क्योंकि फ्लैगशिप फोन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। साल 2026 की पहली छमाही में स्मार्टफोन की औसत सेलिंग प्राइस में 16% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अब जब कई हाई-एंड मॉडल्स की कीमत ₹1 लाख के पार निकल चुकी है, तो आम ग्राहक पुरानी खरीदारी के तौर-तरीकों को छोड़कर मंथली सब्सक्रिप्शन और लीजिंग प्रोग्राम्स की ओर बढ़ रहे हैं।\n\n### कैसे काम कर रहा है ये मॉडल?\n\nइन नए मॉडल्स में यूजर एक निश्चित मंथली फीस देकर लेटेस्ट iPhone, Samsung Galaxy और Google Pixel जैसे प्रीमियम फोन इस्तेमाल कर सकते हैं। 12 से 24 महीने की अवधि के बाद, ग्राहक आसानी से नए मॉडल पर अपग्रेड कर सकते हैं। यह तरीका महंगे फोन की डिमांड को बनाए रखने में मदद कर रहा है, जबकि बाकी स्मार्टफोन बाजार में इस साल 10% से ज्यादा की गिरावट का अनुमान है।\n\n### सेक्टर में प्लेयर्स और ग्रोथ\n\nBytePe जैसी कंपनियां इस सेगमेंट में 20% से 30% तक की मासिक ग्रोथ देख रही हैं। इस पूरे इकोसिस्टम को Servify जैसी कंपनियां सपोर्ट कर रही हैं, जो फोन के लाइफसाइकिल, ट्रेड-इन और रिपेयर को मैनेज करती हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी\n\nबाजार में एक बड़ी बहस छिड़ी है कि क्या ये वाकई में ग्राहक के लिए किफायती हैं या फिर ये सिर्फ 'EMIs in disguise' हैं? यदि इकोनॉमिक हालात बिगड़े, तो इन पेमेंट्स का दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, प्रीमियम सेगमेंट की यह चमक बाकी मार्केट के लिए नहीं है, क्योंकि कम बजट वाले ग्राहक अभी भी 4G फोन्स की ओर लौट रहे हैं। भविष्य में इन सब्सक्रिप्शन प्लान्स का विस्तार टियर-II और टियर-III शहरों में कैसे होता है और सरकार की फाइनेंसिंग नियमों पर क्या नजर रहती है, यह देखना अहम होगा।
