कैल्टेक (Caltech) की प्रोफेसर अनिमा आनंदकुमार का स्टार्टअप 'Accelerated Understanding' अब 'Physical AI' पर काम कर रहा है। यह तकनीक सेमीकंडक्टर और मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों की R&D लागत को भारी स्तर पर कम करने का दम रखती है।
फिजिकल AI का कॉन्सेप्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया अब सिर्फ टेक्स्ट और भाषा तक सीमित नहीं रही। 'Physical AI' का नया दौर आ गया है, जो जटिल भौतिकी (physics) के समीकरणों को हल करने में सक्षम है। कैल्टेक की प्रोफेसर अनिमा आनंदकुमार का स्टार्टअप, Accelerated Understanding, इस दिशा में बड़ी पहल कर रहा है। यह स्टार्टअप अब AI को औद्योगिक डिजाइनों में हीट फ्लो और फ्लूइड डायनामिक्स को मॉडल करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर असर
निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि चिप मेकिंग में 'थर्मल मैनेजमेंट' एक बड़ी चुनौती है। चिप्स छोटे होते जा रहे हैं और उनमें ट्रांजिस्टर की संख्या बढ़ने से हीट की समस्या बढ़ती है। अभी तक इसे टेस्ट करने के लिए महंगे प्रोटोटाइप और लंबी टेस्टिंग की जरूरत होती थी, लेकिन अब Accelerated Understanding के न्यूरल ऑपरेटर्स इसे डिजिटल रूप में ही हल कर देंगे। इससे चिप बनाने की प्रक्रिया में आने वाली लागत और समय (Time-to-market) में भारी कटौती की उम्मीद है।
औद्योगिक उपयोग और भविष्य की संभावनाएं
सिर्फ हार्डवेयर ही नहीं, यह तकनीक मेडिकल डिवाइस जैसे कैथेटर के डिजाइन को सुधारने में भी सफल रही है। एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और सस्टेनेबल एनर्जी जैसे सेक्टर, जहां फिजिकल टेस्टिंग बेहद महंगी या जोखिम भरी होती है, वहां यह तकनीक मील का पत्थर साबित हो सकती है। भारत के बढ़ते सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिहाज से ऐसी टेक्नोलॉजी की दक्षता सीधे कंपनियों के मुनाफे (Profitability) और कॉम्पिटिटिवनेस से जुड़ती है।
जोखिम और चुनौतियां
फिलहाल यह तकनीक शुरुआती दौर में है। स्टार्टअप को भारी कंप्यूटिंग पावर के लिए बड़ी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप करनी पड़ती है, जो एक बड़ा खर्च है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या यह तकनीक पायलट टेस्टिंग से निकलकर बड़े इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म्स पर कब तक जगह बना पाती है। इसकी सफलता पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह पारंपरिक टेस्टिंग सॉफ्टवेयर के मुकाबले वाकई सटीक परिणाम दे पाती है या नहीं।
