PhonePe ने ग्रामीण भारत में अपनी पैठ जमाने के लिए **20,000** नए कर्मचारियों की नियुक्ति और **50 लाख** पेमेंट डिवाइस लगाने का ऐलान किया है। हालांकि PhonePe लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसकी इस आक्रामक विस्तार नीति से Paytm जैसी कंपनियों पर मार्केट शेयर बचाने का दबाव बढ़ सकता है।
ग्रामीण इलाकों पर नजर
Walmart समर्थित डिजिटल पेमेंट दिग्गज PhonePe ने अब सीधे 'Tier 6' कस्बों और सुदूर गांवों को टारगेट किया है। कंपनी इन इलाकों में स्मार्ट स्पीकर्स और पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) टर्मिनल लगाने जा रही है। अब तक कंपनियां मर्चेंट ऑनबोर्डिंग के लिए कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ पर निर्भर थीं, लेकिन PhonePe अब अपनी परमानेंट सेल्स टीम खड़ी कर रहा है।
क्यों है यह रणनीतिक चाल?
UPI ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) जीरो होने के कारण सीधे तौर पर कमाई की गुंजाइश कम है। ऐसे में PhonePe का मकसद छोटे दुकानदारों को अपने डिजिटल नेटवर्क में लाकर डेटा कैप्चर करना है, ताकि भविष्य में उन्हें क्रेडिट प्रोडक्ट्स (उधारी) ऑफर किए जा सकें। यह एक लंबी अवधि का गेम है, जिसमें कंपनी तुरंत प्रॉफिट के बजाय मार्केट शेयर कब्जाने पर जोर दे रही है।
लिस्टेड कंपनियों के लिए क्या है रिस्क?
इस कदम का सीधा असर शेयर बाजार में लिस्टेड One97 Communications (Paytm) जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है। प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए अब इन कंपनियों को भी अपना खर्च बढ़ाना पड़ सकता है।
निवेशकों को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- ऑपरेटिंग कॉस्ट: हार्डवेयर लगाने और इतनी बड़ी सेल्स टीम को संभालने में भारी निवेश की जरूरत होती है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
- कैश-फ्लो: क्या कंपनियां इस खर्च को झेलते हुए प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रख पाएंगी?
- प्रतिस्पर्धा: अगर अन्य कंपनियां भी जवाब में ऐसी ही आक्रामक रणनीति अपनाती हैं, तो पूरे Fintech सेक्टर में 'स्पेंडिंग वॉर' (खर्च की जंग) शुरू हो सकती है।
