Fintech दिग्गज PhonePe ने अपने ऑपरेशंस को बदलने के लिए एडवांस AI एजेंट्स तैनात किए हैं। अब कंपनी हर महीने 1,000 करोड़ से ज्यादा ट्रांजेक्शन को AI की मदद से मैनेज कर रही है, जिससे मानवीय दखल और खर्च में बड़ी कमी आई है।
लागत घटाने के लिए 'एजेंटिक' AI का सहारा
भारत के UPI इकोसिस्टम की दिग्गज कंपनी PhonePe अब पूरी तरह से 'एजेंटिक' (agentic) AI टूल्स पर शिफ्ट हो गई है। कंपनी का स्केल इतना बड़ा है कि अब प्रति 2 करोड़ ट्रांजेक्शन पर सिर्फ एक मानव एजेंट की जरूरत पड़ती है। यह कदम तकनीकी अपग्रेड से ज्यादा कंपनी के खर्चे कम करने की एक रणनीति है।
आंकड़ों में समझें सुधार
AI के दम पर कंपनी ने अपनी सर्विस क्वालिटी में सुधार किया है:
- 92% कस्टमर सपोर्ट क्वेरीज अब AI खुद हल कर रहा है।
- 80% फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन का काम AI एंड-टू-एंड निपटा रहा है।
- एक फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन की लागत पहले करीब ₹50 आती थी, जो अब घटकर ₹5 से ₹15 के बीच आ गई है।
फाइनेंशियल सेहत और IPO का भविष्य
कंपनी के फाइनेंशियल डिस्क्लोजर के मुताबिक, PhonePe का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹7,920 करोड़ रहा, लेकिन नेट लॉस ₹2,792 करोड़ दर्ज किया गया। कंपनी अब अपने मार्जिन को सुधारने के लिए लेंडिंग (Lending) और वेल्थ मैनेजमेंट जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार कर रही है।
हालांकि कंपनी पब्लिक लिमिटेड बन चुकी है और IPO की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन मार्केट की अस्थिरता के चलते अभी लिस्टिंग टाल दी गई है। आने वाले समय में कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती रेगुलेटरी नियम और UPI मार्केट शेयर पर संभावित कैप (Cap) की है, जो इसकी ग्रोथ को प्रभावित कर सकते हैं।
