PhonePe अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा ले रही है ताकि नए डिजिटल यूजर्स को आसानी से जोड़ा जा सके। वालमार्ट के मालिकाना हक वाली यह कंपनी पेमेंट के दायरे से बाहर निकलकर अपने मुनाफे को सुधारने और ऑपरेशनल खर्च को कम करने के लिए ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर रही है।
ऑटोमेशन से बदलेगी फाइनेंशियल सर्विस
PhonePe अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। कंपनी 'इंटेंट-लेड' (Intent-led) फाइनेंशियल सर्विस पर फोकस कर रही है, जहां यूजर्स जटिल मेन्यू के बजाय वॉइस या टेक्स्ट कमांड का इस्तेमाल करके ऐप चला सकेंगे। इसे कंपनी 'बैंक ब्रांच ऑफ वन' का नाम दे रही है, जिससे उन लोगों के लिए डिजिटल रास्ता आसान होगा जो अपनी स्थानीय भाषाओं में बातचीत करना पसंद करते हैं।
कैसे कम होगी लागत?
यह केवल सुविधा की बात नहीं है, बल्कि खर्च पर लगाम लगाने की एक सोची-समझी रणनीति भी है। PhonePe ने अपने बैकएंड में AI को पूरी तरह इंटीग्रेट कर लिया है। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी के AI एजेंट अब 92% से ज्यादा सपोर्ट टिकट्स को खुद हल कर रहे हैं। सबसे बड़ा फायदा फ्रॉड डिटेक्शन में हुआ है, जहां AI 80% जांच खुद कर रहा है। इससे प्रति जांच की लागत ₹50 से गिरकर महज ₹5 से ₹15 के बीच आ गई है। मुनाफे के रास्ते पर चल रही कंपनी के लिए यह बहुत बड़ी कामयाबी है।
छोटे व्यापारियों के लिए खास टूल्स
कंपनी 'PG SmartPages' जैसे टूल्स लॉन्च कर रही है, जिससे छोटे व्यापारी सिर्फ 10 मिनट में पेमेंट-रेडी वेबसाइट बना सकते हैं। इसके अलावा, एंटरप्राइज यूजर्स के लिए AI-गाइडेड वर्कफ्लो तैयार किए गए हैं ताकि पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को खत्म किया जा सके।
फाइनेंशियल सेहत और IPO की स्थिति
आर्थिक मोर्चे पर बात करें तो वालमार्ट की इस यूनिट ने FY26 में ₹7,920 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया है, जो पिछले साल के मुकाबले 11.5% की बढ़त है। हालांकि, कंपनी को अभी भी ₹2,792 करोड़ का नेट लॉस है, जो आक्रामक विस्तार और टिकाऊ मुनाफे के बीच के संघर्ष को दिखाता है। निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल IPO का है, जिसे फिलहाल ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के कारण टाल दिया गया है। कंपनी की सफलता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वह अपने 70 करोड़ से ज्यादा के यूजर बेस को मुनाफे वाले बिजनेस में बदल पाती है या नहीं।
