PhonePe का जलवा जारी! UPI ट्रांजैक्शन में जुलाई में मारी बाजी, 10.86 अरब ट्रांजैक्शन के साथ टॉप पर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
PhonePe का जलवा जारी! UPI ट्रांजैक्शन में जुलाई में मारी बाजी, 10.86 अरब ट्रांजैक्शन के साथ टॉप पर

जुलाई 2026 में भारत के UPI नेटवर्क ने रिकॉर्ड **23.66 अरब** ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिसमें PhonePe ने **45.89%** की हिस्सेदारी हासिल की। हालाँकि ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, डिजिटल पेमेंट सेक्टर मार्केट शेयर कैप्स और प्रमुख खिलाड़ियों के लिए लाभप्रदता (profitability) की लगातार चुनौतियों से जूझ रहा है।

UPI ट्रांजैक्शन में नया रिकॉर्ड

जुलाई 2026 में भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के ज़रिए रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करके एक नया मुकाम हासिल किया है। इन ट्रांजैक्शन का कुल मूल्य ₹29.88 लाख करोड़ रहा, जो देश भर में डिजिटल पेमेंट्स को अपनाने की निरंतरता को दर्शाता है। PhonePe ने 10.86 अरब ट्रांजैक्शन प्रोसेस करते हुए अपनी मार्केट लीडरशिप बरकरार रखी, और कुल मासिक वॉल्यूम में 45.89% की हिस्सेदारी पक्की की।

Google Pay और Paytm की स्थिति

PhonePe के बाद, Google Pay 7.65 अरब ट्रांजैक्शन के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी मार्केट हिस्सेदारी 32.33% रही। इन दोनों प्लेटफॉर्म्स ने मिलकर UPI पर होने वाले कुल ट्रांजैक्शन में तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी निभाई, जो मार्केट कंसंट्रेशन को उजागर करता है। Paytm 1.90 अरब ट्रांजैक्शन के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जिसने कुल वॉल्यूम का 8.05% योगदान दिया।

कंपनी की वित्तीय स्थिति और IPO प्लान

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि PhonePe वर्तमान में एक प्राइवेट कंपनी है और स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टेड नहीं है। ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और भू-राजनीतिक स्थितियों के कारण इसके इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की योजना बार-बार स्थगित की गई है। फाइनेंशियल ईयर 26 के अनुसार, कंपनी ने ₹7,920 करोड़ का ऑपरेटिंग रेवेन्यू दर्ज किया, जो 11% की ग्रोथ दिखाता है। हालांकि, कंपनी ने ₹2,792 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट लॉस भी रिपोर्ट किया है। इस वित्तीय प्रदर्शन पर हाई ऑपरेटिंग कॉस्ट, स्टॉक-आधारित कंपनसेशन एक्सपेंस और कुछ रेवेन्यू-जेनरेटिंग सेगमेंट्स के बंद होने का असर पड़ा है।

रेगुलेटरी जोखिम और मार्केट कैप्स

PhonePe और Google Pay जैसे प्रमुख खिलाड़ियों की UPI इकोसिस्टम पर मजबूत पकड़ ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का ध्यान खींचा है। ड्युओपॉली (duopoly) को रोकने और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए, रेगुलेटर ने एक ऐसी पॉलिसी पेश की है जिसका उद्देश्य किसी एक पेमेंट एप्लीकेशन के वॉल्यूम शेयर को 30% तक सीमित करना है। हालाँकि इस कैप के लागू होने की समय-सीमा में देरी हुई है, यह एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी जोखिम बना हुआ है। यदि इसे सख्ती से लागू किया गया, तो मौजूदा खिलाड़ियों और नए प्रवेशकों के बीच मार्केट शेयर का पुनर्वितरण हो सकता है।

इसके अतिरिक्त, यह सेक्टर रेगुलेटरी बाधाओं का सामना करना जारी रखे हुए है जो प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करती हैं। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) के हालिया दिशानिर्देशों, जिनमें रियल-मनी गेमिंग और रेंट पेमेंट्स पर सख्त नियम शामिल हैं, ने पेमेंट प्रोवाइडर्स के लिए कुछ रेवेन्यू स्ट्रीम को प्रतिबंधित कर दिया है। इन रेगुलेटरी बदलावों, तीव्र प्रतिस्पर्धा के साथ मिलकर, इंडस्ट्री के लिए स्थायी लाभप्रदता (profitability) प्राप्त करना एक कठिन चुनौती बना हुआ है।

डिजिटल पेमेंट्स स्पेस की निगरानी करने वालों के लिए, आने वाली तिमाहियों में मुख्य फोकस NPCI द्वारा 30% वॉल्यूम कैप के प्रवर्तन पर किसी भी अपडेट और कंपनियों की केवल ट्रांजैक्शन प्रोसेसिंग से परे अपने रेवेन्यू मॉडल को डाइवर्सिफाई करने की क्षमता पर रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.