फिनटेक कंपनी PhiCommerce अगले **18 महीनों** में छोटे बैंकों को पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराकर अपने SaaS-आधारित रेवेन्यू शेयर को दोगुना कर **40%** तक पहुंचाना चाहती है। इस रणनीति से छोटे बैंक अपनी मर्चेंट डील्स को खुद संभाल पाएंगे, और बड़े वित्तीय संस्थानों पर निर्भरता कम होगी।
छोटे बैंकों को मिलेगी आज़ादी
PhiCommerce अब छोटे और मध्यम आकार के बैंकों को अपना पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर खुद संभालने में मदद करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी अपने सॉफ्टवेयर-एज़-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म के ज़रिए कार्ड इश्यूइंग और मर्चेंट एक्वायरिंग जैसी सेवाएं दे रही है। अगले 18 महीनों में, PhiCommerce को उम्मीद है कि इस सेगमेंट से उसका कुल रेवेन्यू 40% तक पहुंच जाएगा, जो कि वर्तमान में 20% है। बाकी का बिज़नेस पेमेंट एग्रीगेशन से आता रहेगा।
क्यों बदल रही है रणनीति?
छोटे बैंकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होती है कि वे मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन (Merchant Transaction) के लिए अक्सर बड़े बैंकों पर निर्भर रहते हैं। PhiCommerce की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, ये बैंक अपने पेमेंट सिस्टम और मर्चेंट रिलेशंस (Merchant Relations) पर सीधा कंट्रोल हासिल कर सकते हैं। इससे वे ट्रांज़ैक्शन डेटा को अपने पास रख सकेंगे और अपने कॉर्पोरेट क्लाइंट्स (Corporate Clients) के साथ मज़बूत रिश्ते बना पाएंगे। कंपनी के को-फाउंडर राजेश लौंडे के अनुसार, डेटा सिक्योरिटी को लेकर PhiCommerce अपने एग्रीगेशन और SaaS ऑपरेशंस को अलग रखती है, जो कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गाइडलाइन्स का पालन करने वाले बैंकों के लिए बहुत ज़रूरी है।
भविष्य की योजनाएं
PhiCommerce के पास ऑनलाइन और ऑफलाइन पेमेंट एग्रीगेशन दोनों के लिए RBI लाइसेंस हैं और कंपनी अपने ग्राहकों का दायरा बढ़ा रही है। इस 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के अंत तक, PhiCommerce का लक्ष्य 2 से 3 और बैंकों को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म से जोड़ना है। कंपनी कई अन्य संभावित बैंकिंग पार्टनर्स के साथ बातचीत कर रही है। भारत के अलावा, PhiCommerce अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी कदम रखने की तैयारी में है और जापान व पेरू जैसे देशों में प्रवेश करने की योजना बना रही है।
निवेशकों के लिए अहम बातें
निवेशकों और इंडस्ट्री को इस बात पर नज़र रखनी होगी कि छोटे बैंक इस प्लेटफॉर्म को कितनी तेज़ी से अपनाते हैं, क्योंकि कंपनी का रेवेन्यू टारगेट इसी पर निर्भर करता है। इसके अलावा, PhiCommerce इन नए इंप्लीमेंटेशन्स से जुड़े ऑपरेशनल रिस्क (Operational Risk) को कैसे मैनेज करती है और बदलते रेवेन्यू मिक्स के बीच मुनाफे को बनाए रखती है, यह भी देखना अहम होगा। जापान और पेरू जैसे प्रतिस्पर्धी बाज़ारों में कंपनी की अंतरराष्ट्रीय विस्तार की सफलता, भारतीय वित्तीय इकोसिस्टम से बाहर इसके दीर्घकालिक विकास का एक प्रमुख संकेतक रहेगी।
