पुणे की IT कंपनी Persistent Systems ने जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro को खरीदने का ऐलान किया है। कंपनी प्रति शेयर €81 के भाव पर यह अधिग्रहण करेगी, जिसकी कुल कीमत करीब €1.3 बिलियन (लगभग ₹11,000 करोड़) है। यह Persistent Systems का अब तक का सबसे बड़ा विदेशी अधिग्रहण है, जिसका मकसद यूरोप में अपनी मौजूदगी और AI क्षमताओं को बढ़ाना है।
क्या हुआ है?
पुणे स्थित Persistent Systems ने जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी Nagarro Group को खरीदने की अपनी योजना का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। Persistent ने Nagarro के शेयर €81 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने का प्रस्ताव दिया है, जिससे जर्मन कंपनी का कुल मूल्यांकन लगभग €1.3 बिलियन (लगभग ₹11,000 करोड़) हो गया है। भारतीय IT कंपनी ने Nagarro के सबसे बड़े शेयरधारक Lantano Beteiligungen GmbH से 21% हिस्सेदारी खरीदने के लिए पहले ही एक एग्रीमेंट साइन कर लिया है। इस प्रक्रिया को संभालने के लिए, Persistent ने Galaxy Germany Holding SE नाम की एक नई जर्मन सब्सिडियरी बनाई है, जो बाकी बचे शेयरों को खरीदने के लिए एक वॉलंटरी ओपन ऑफर शुरू करेगी।
डील के पीछे की रणनीति
यह अधिग्रहण Persistent की ग्रोथ स्ट्रैटेजी का एक अहम कदम है। Nagarro डिजिटल इंजीनियरिंग और AI-संचालित सॉल्यूशंस में गहरी विशेषज्ञता रखती है, जो इस समय काफी डिमांड में हैं। Persistent के लिए, यह डील यूरोप में अपनी उपस्थिति को काफी बढ़ाने का जरिया है, जहां कंपनी का वर्तमान बिजनेस का लगभग दसवां हिस्सा आता है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि दोनों कंपनियों के विलय से एक मजबूत इकाई बनेगी जो ग्लोबल क्लाइंट्स को इंटीग्रेटेड AI, क्लाउड और डेटा क्षमताओं के साथ सपोर्ट कर सकेगी। अधिग्रहण पूरा होने के बाद, Persistent का लक्ष्य Nagarro को फ्रैंकफर्ट स्टॉक एक्सचेंज से डीलिस्ट करना है।
फाइनेंसिंग और डील की संरचना
इस बड़े ट्रांजेक्शन को फंड करने के लिए, Persistent ने Barclays Bank से €1.4 बिलियन की ब्रिज फैसिलिटी (Bridge Facility) सुरक्षित की है। ब्रिज फैसिलिटी एक तरह का शॉर्ट-टर्म लोन होता है जिसका इस्तेमाल तुरंत जरूरत को पूरा करने के लिए किया जाता है – इस मामले में अधिग्रहण के लिए – ताकि कंपनी लंबे समय के लिए स्थायी फंडिंग की व्यवस्था कर सके। हालांकि इससे Persistent को तेजी से कदम उठाने का मौका मिलेगा, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि कंपनी पर काफी कर्ज चढ़ेगा। निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी इस लीवरेज (Leverage) को कैसे मैनेज करती है और क्या इसका भविष्य के कैश फ्लो पर कोई असर पड़ता है।
चुनौतियां और जोखिम
इतने बड़े पैमाने पर क्रॉस-बॉर्डर अधिग्रहण में कई तरह के जोखिम शामिल होते हैं। अलग-अलग ऑपरेशनल स्ट्रक्चर, कल्चर और भौगोलिक विस्तार वाली दो बड़ी कंपनियों को एकीकृत करना काफी जटिल हो सकता है। इसके अलावा, विभिन्न ज्यूरिसडिक्शन (Jurisdictions) में रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approvals) मिलने से जुड़े जोखिम भी हैं, साथ ही अनपेक्षित इंटीग्रेशन कॉस्ट (Integration Costs) का भी खतरा है। चूंकि कंपनी खरीद के लिए कर्ज का इस्तेमाल कर रही है, इसलिए उसे ब्याज भुगतान को पूरा करने के लिए मजबूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस बनाए रखने की आवश्यकता होगी। इन जटिलताओं को मैनेज करना और यह सुनिश्चित करना कि संयुक्त इकाई का विकास जारी रहे, मैनेजमेंट टीम के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
इस डील के 2026 के अंत और 2027 की पहली तिमाही के बीच पूरा होने की उम्मीद है। आगे चलकर, निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अपडेट्स ओपन ऑफर की प्रगति और शेयरधारक स्वीकृति का स्तर होंगे, क्योंकि इस डील के सफल होने के लिए 50% से अधिक की स्वीकृति की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, निवेशक ब्रिज फैसिलिटी के रीपेमेंट प्लान, Nagarro के ऑपरेशंस को एकीकृत करने की समय-सीमा और आने वाली तिमाहियों में संयुक्त इकाई के प्रॉफिट मार्जिन के विकास के बारे में मैनेजमेंट की टिप्पणियों पर भी नजर रख सकते हैं।
