भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में डील वैल्यू **38%** बढ़कर **$3.5 बिलियन** पर पहुंच गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह Persistent Systems द्वारा Nagarro की **$1.4 बिलियन** की बड़ी खरीदारी है।
भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में 2026 की तीसरी तिमाही (Q3) के दौरान कैपिटल मूवमेंट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टोटल डील वैल्यू $3.5 बिलियन तक पहुंच गई है, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 38% ज्यादा है। यह आंकड़ा यह दिखाता है कि कंपनियां अब छोटी-मोटी डील की जगह बड़े स्तर पर कंसोलिडेशन (Consolidation) पर ध्यान दे रही हैं।
इस उछाल के पीछे की बड़ी वजह
इस तिमाही की सबसे बड़ी खबर Persistent Systems द्वारा Nagarro SE का $1.4 बिलियन में अधिग्रहण है। यह भारत के इतिहास की सबसे बड़ी आउटबाउंड टेक्नोलॉजी डील्स में से एक है। कंपनियां अब ऑर्गेनिक ग्रोथ की राह देखने के बजाय सीधे खरीदारी (Acquisition) के जरिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई सर्विस लाइन में अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं।
प्राइवेट इक्विटी में भारी गिरावट
मर्जर और एक्विजिशन (M&A) जहां तेजी पर हैं, वहीं प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल की फंडिंग में बड़ी गिरावट आई है। यह आंकड़ा दूसरी तिमाही के $1.5 बिलियन से घटकर तीसरी तिमाही में महज $301 मिलियन रह गया है। साफ है कि निवेशक अब केवल ग्रोथ नहीं, बल्कि सस्टेनेबल प्रॉफिट की तलाश में हैं और बहुत ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
पब्लिक मार्केट का सहारा
प्राइवेट फंडिंग की कमी को पूरा करने के लिए कंपनियां अब पब्लिक मार्केट का रुख कर रही हैं। इस तिमाही में IPO और QIP (Qualified Institutional Placements) के जरिए कंपनियों ने $398 मिलियन जुटाए हैं। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या ये बड़े अधिग्रहण आने वाले समय में कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को बढ़ा पाएंगे या फिर इंटीग्रेशन से जुड़ी चुनौतियां पैदा होंगी।
