Persistent Systems के शेयरों में शुक्रवार सुबह **2.85%** की गिरावट देखी गई, जो **₹5,357.60** पर ट्रेड कर रहे थे। यह गिरावट Nifty Midcap 150 इंडेक्स पर टॉप लूजर्स में से एक है। हालांकि, कंपनी ने हाल ही में फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) के लिए अपने सालाना नेट प्रॉफिट में **33%** का शानदार उछाल दर्ज किया है।
मुनाफे में उछाल के बावजूद शेयर क्यों गिरे?
Persistent Systems के शेयर में शुक्रवार को इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान 2.85% की गिरावट आई और यह ₹5,357.60 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट ने कंपनी को Nifty Midcap 150 इंडेक्स पर सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों की सूची में ला खड़ा किया।
कंपनी की वित्तीय सेहत?
कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से जारी की गई फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) की रिपोर्ट के अनुसार, कंसोलिडेटेड रेवेन्यू में 23.53% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹11,938.72 करोड़ से बढ़कर ₹14,748.45 करोड़ हो गया है। नेट प्रॉफिट भी 33.21% बढ़कर ₹1,865.12 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹1,400.16 करोड़ था। प्रति शेयर आय (EPS) में भी उछाल देखा गया, जो ₹119.74 रहा, जबकि पिछले वर्ष यह ₹91.22 था।
हालिया तिमाही के आंकड़े भी कंपनी के अच्छे प्रदर्शन को दर्शाते हैं। मार्च 2026 को समाप्त हुई तिमाही में, कंपनी का रेवेन्यू 7.35% बढ़कर ₹4,055.94 करोड़ हुआ और नेट प्रॉफिट 20.44% की बढ़ोतरी के साथ ₹529.26 करोड़ दर्ज किया गया।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
वित्तीय नतीजों के अलावा, Persistent Systems ने शेयरधारकों को रिटर्न देने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। कंपनी ने अप्रैल 2026 में ₹18.00 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड (Dividend) घोषित किया, जबकि जनवरी 2026 में ₹22.00 प्रति शेयर का अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) दिया गया था। यह लगातार डिविडेंड भुगतान कंपनी की मजबूत कैश जनरेशन क्षमता का संकेत माना जाता है। इसके अलावा, 2024 की शुरुआत में हुए 2-फॉर-1 स्टॉक स्प्लिट (Stock Split) को भी निवेशक याद कर सकते हैं, जिसने शेयर की लिक्विडिटी (Liquidity) को बेहतर बनाने में मदद की थी।
हालांकि, IT सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों को वैश्विक मांग में बदलाव, करेंसी में उतार-चढ़ाव और बढ़ती लागत (जैसे वेतन वृद्धि) जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। निवेशकों की नज़रें इस बात पर टिकी रहेंगी कि Persistent Systems इन चुनौतियों के बीच अपने मार्जिन (Margins) और रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth) को बनाए रख पाती है या नहीं। कंपनी के भविष्य के सौदों (Deal Pipeline) और लागत प्रबंधन (Cost Management) की रणनीतियों पर भी निवेशकों की पैनी नज़र रहेगी।
