Persistent Systems ने Nagarro SE को **$1.25 बिलियन** में खरीदने के लिए फंड जुटा लिया है। कंपनी ने **$450 मिलियन** इक्विटी और **$800 मिलियन** कर्ज के जरिए यह डील की है। कंपनी ने **94%** हिस्सेदारी हासिल कर ली है, लेकिन अब चुनौती कम प्रॉफिट मार्जिन वाली इस कंपनी को खुद के साथ इंटीग्रेट करने की है।
बड़ी डील और फंडिंग का गणित
Persistent Systems ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा अधिग्रहण पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने $1.25 बिलियन जुटाकर जर्मनी की Nagarro SE को खरीदने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसके लिए $450 मिलियन की राशि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए जुटाई गई है, जबकि बाकी $800 मिलियन का इंतजाम नॉन-कंवर्टिबल डिबेंचर्स और कमर्शियल पेपर जैसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स से किया गया है।
डिलिस्टिंग और एकीकरण की चुनौती
कंपनी ने Nagarro के 94% वोटिंग राइट्स पहले ही हासिल कर लिए हैं। प्रबंधन अब Nagarro को Frankfurt Stock Exchange से डी-लिस्ट करने की तैयारी में है, जो प्रक्रिया मार्च 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, यह अधिग्रहण आकार में तो बड़ी है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी जुड़ गई हैं।
मार्जिन और मुनाफे पर दबाव
Nagarro का प्रॉफिट मार्जिन Persistent Systems के मुकाबले कम है और इसकी ग्रोथ रेट भी धीमी है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में ही इसका असर दिखने लगा है। प्रबंधन का लक्ष्य EBIT मार्जिन को 16 से 17% के दायरे में रखने का है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स को इसे हासिल करने पर संदेह है। Nuvama जैसे ब्रोकरेज ने फाइनेंशियल ईयर 2027 और 2028 के लिए अर्निंग पर शेयर (EPS) के अनुमानों में 4% की कटौती की है।
क्रेडिट रेटिंग और मैनेजमेंट की अग्निपरीक्षा
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी CRISIL का मानना है कि इस डील की कामयाबी पूरी तरह से Nagarro में कर्मचारियों के बेहतर इस्तेमाल और ग्रोथ को रफ्तार देने पर निर्भर करेगी। चूंकि Nagarro का आकार Persistent Systems का लगभग तीन-चौथाई है, इसलिए इंटीग्रेशन बहुत ही जटिल होने वाला है।
निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल यह होगा कि कंपनी कर्ज कम करने की गति को कैसे बनाए रखती है और एकीकरण के दौरान खर्चों को कैसे कंट्रोल करती है।
