Persistent Systems ने पहली तिमाही में अपने नेट प्रॉफिट में **13.7%** का इजाफा दर्ज किया है, जो **₹483 करोड़** रहा। कंपनी के रेवेन्यू में भी **29%** की शानदार बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही, कंपनी ने यूरोपीय फर्म Nagarro के साथ मर्जर (Merger) का भी ऐलान किया है, जिसका मकसद एक AI-संचालित ग्लोबल इंजीनियरिंग कंपनी बनाना है।
ऑर्डर में रिकॉर्ड उछाल और वर्टिकल ग्रोथ
Persistent Systems ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का टोटल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू (Total Contract Value) $1.15 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसी के साथ, कंपनी का नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹483.04 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹424.93 करोड़ था। रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from operations) में भी 29% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई, जो ₹4,303.22 करोड़ तक पहुंच गया।
यह मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ मुख्य रूप से एक ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म के साथ हुए 6.5 साल के सर्विस एग्रीमेंट से आई है, जिसकी वैल्यू $650 मिलियन से अधिक है। यह बड़ा ऑर्डर कंपनी की लंबी अवधि के सौदे हासिल करने की क्षमता को दर्शाता है। सेगमेंट्स की बात करें तो, सॉफ्टवेयर, हाई-टेक और इमर्जिंग इंडस्ट्रीज वर्टिकल ने रेवेन्यू में 40.7% का सबसे बड़ा योगदान दिया। बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज के साथ-साथ हेल्थकेयर सेक्टर में भी डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई। हालांकि, साल-दर-साल ग्रोथ मजबूत रही, कंपनी ने नेट प्रॉफिट में 8.7% की सीक्वेंशियल गिरावट दर्ज की, जिसका कारण इस तिमाही के दौरान फॉरेन एक्सचेंज लॉसेस (Foreign Exchange Losses) को बताया गया है।
Nagarro के साथ स्ट्रेटेजिक विस्तार
तिमाही नतीजों से परे, Persistent Systems ने यूरोप स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro के साथ एक बिजनेस कॉम्बिनेशन एग्रीमेंट (Business Combination Agreement) किया है। यह कदम कंपनी के ग्लोबल फुटप्रिंट (Global Footprint) का विस्तार करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत संयुक्त इकाई का रेवेन्यू रन रेट लगभग $2.9 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए, इस कॉम्बिनेशन की सफलता Nagarro के ऑपरेशंस और वर्कफोर्स को एकीकृत करने की कंपनी की क्षमता पर निर्भर करेगी। इस ट्रांजेक्शन के 2026 के चौथे तिमाही और 2027 की पहली तिमाही के बीच पूरा होने की उम्मीद है।
जोखिम और भविष्य पर नजर
जहां ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी ऐसे बड़े पैमाने की परियोजनाओं के एग्जीक्यूशन (Execution) को कैसे मैनेज करती है, क्योंकि परियोजनाओं में देरी या लागत में वृद्धि से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। इसके अलावा, कंपनी का लगभग 80% रेवेन्यू उत्तरी अमेरिका से आता है, इसलिए वह उस क्षेत्र में आर्थिक बदलावों के प्रति संवेदनशील बनी हुई है। हितधारकों के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम Nagarro मर्जर के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) प्रक्रिया का अवलोकन करना और यह निगरानी करना होगा कि कंपनी इस तिमाही में अनुभव की गई फॉरेन एक्सचेंज की अस्थिरता के बावजूद अपने मार्जिन स्तर को बनाए रख पाती है या नहीं। कंपनी के कर्मचारियों की संख्या भी बढ़कर 28,640 हो गई है, जो बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए क्षमता बढ़ाने पर कंपनी के फोकस को दर्शाता है।
