भारतीय IT कंपनी Persistent Systems ने जर्मनी की डिजिटल इंजीनियरिंग फर्म Nagarro SE को €81 प्रति शेयर के ऑल-कैश ऑफर पर अधिग्रहण करने की घोषणा की है। यह कदम कंपनी के ग्लोबल रेवेन्यू को लगभग $2.9 बिलियन तक बढ़ाने और यूरोप में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लक्ष्य के साथ उठाया गया है। खास बात यह है कि यह ऑफर Nagarro के शेयर की मौजूदा कीमत से काफी प्रीमियम पर है, जबकि दोनों कंपनियों के शेयर इस साल अब तक गिरावट झेल चुके हैं।
क्या है पूरा मामला?
Persistent Systems ने जर्मनी स्थित डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी Nagarro SE के लिए एक स्वैच्छिक पब्लिक टेकओवर (Voluntary Public Takeover) का ऐलान किया है। कंपनी ने प्रति शेयर €81 नकद भुगतान का प्रस्ताव रखा है। अगर यह डील सफल होती है, तो यह भारतीय IT सेवाओं की किसी कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े सीमा-पार अधिग्रहणों (Cross-border Acquisitions) में से एक होगी। Nagarro के मुख्य शेयरधारक Lantano, जिसके पास 21% हिस्सेदारी है, ने इस ऑफर की शर्तों को स्वीकार कर लिया है, जिससे इस सौदे को शुरुआती मजबूती मिली है।
यूरोप में विस्तार की योजना
इस अधिग्रहण का मुख्य उद्देश्य Persistent Systems की यूरोप में पैठ बढ़ाना है, जो फिलहाल कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 9% हिस्सा है। इस डील के बाद, यूरोप से होने वाली आय का यह हिस्सा बढ़कर 22% होने की उम्मीद है। दोनों कंपनियों के एक साथ आने के बाद, संयुक्त इकाई का वार्षिक रेवेन्यू रन-रेट (Annual Revenue Run-Rate) करीब $2.9 बिलियन तक पहुंच जाएगा। इसके अलावा, 46,000 से अधिक पेशेवरों की ग्लोबल वर्कफोर्स के साथ, Persistent 40 से अधिक देशों में अपनी पहुंच बढ़ाना चाहती है। कंपनी का लक्ष्य हेल्थकेयर, BFSI, टेलीकम्युनिकेशन और इंडस्ट्रियल गुड्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपने एड्रेसेबल मार्केट (Addressable Market) को $1.4 ट्रिलियन से अधिक तक फैलाना है।
फाइनेंसिंग और भविष्य का अनुमान
Persistent Systems इस अधिग्रहण की पूरी लागत अपने कैश रिजर्व (Cash Reserves) से चुकाने की योजना बना रही है, साथ ही Barclays से अतिरिक्त फाइनेंसिंग की व्यवस्था भी की गई है। कंपनी को उम्मीद है कि यह सौदा पूरा होने के एक साल के भीतर ही मुनाफे में योगदान देना शुरू कर देगा (Earnings Accretive)। अधिग्रहण के बाद भी, कंपनी का अनुमान है कि उसका लीवरेज लेवल (Leverage Levels) नियंत्रण में रहेगा और अगले दो वर्षों में कम होता जाएगा। Nagarro ने कैलेंडर वर्ष 2025 में €999 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया था, जिसमें 6.1% की वृद्धि (Constant Currency में) और 32.2% का ग्रॉस मार्जिन शामिल था।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
€81 प्रति शेयर का ऑफर Nagarro के 25 जून, 2026 के क्लोजिंग प्राइस से लगभग 140% और पिछले तीन महीनों के वेटेड एवरेज प्राइस (Weighted Average Price) से करीब 94% अधिक प्रीमियम पर है। यह प्रीमियम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि Nagarro के शेयर 2026 में अब तक लगभग 47% गिर चुके थे। दूसरी ओर, Persistent Systems के शेयर भी दबाव में रहे हैं और इस साल अब तक 23% नीचे आ चुके हैं। निवेशक इस अधिग्रहण को कंसॉलिडेशन (Consolidation) के जरिए मार्केट शेयर हासिल करने के कदम के रूप में देख सकते हैं, हालांकि दिया गया भारी प्रीमियम यूरोपियन IT सर्विसेज सेक्टर में मौजूदा वैल्यूएशन गैप को दर्शाता है।
आगे क्या देखें?
यह डील उम्मीद है कि चौथे क्वार्टर 2026 या पहले क्वार्टर 2027 तक पूरी हो जाएगी, बशर्ते सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approvals) मिल जाएं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि टेंडर ऑफर (Tender Offer) की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है, यूरोप में कोई रेगुलेटरी अड़चन आती है या नहीं, और कंपनी Nagarro के ऑपरेशंस को कैसे इंटीग्रेट करती है। इसके अलावा, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह कम से कम दो साल तक डोमिनेशन और प्रॉफिट ट्रांसफर एग्रीमेंट (Domination and Profit Transfer Agreement) लागू करने की योजना नहीं बना रही है, जो शेयरधारकों के लिए एक महत्वपूर्ण बात होगी।
