पेटीएम (Paytm) के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने भारत में डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ बढ़ते विरोध को 'woke mindset' करार दिया है। उनका मानना है कि यह सोच देश की तकनीकी प्रगति में बाधा डाल सकती है। यह बयान विशाखापत्तनम में गूगल (Google) और अडानी (Adani) के **$15 अरब** के बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच आया है, जहाँ स्थानीय लोग पानी और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को लेकर विरोध कर रहे हैं। इसी बीच, पेटीएम ने Q1 FY27 में **₹220 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है, और इसके शेयर 52-हफ्ते की ऊंचाई के करीब कारोबार कर रहे हैं।
विरोध को बताया 'Woke Mindset'
विजय शेखर शर्मा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ भारत में बढ़ते विरोध पर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने ऐसे विरोध प्रदर्शनों को 'woke mindset' कहा है, जो देश की तकनीकी प्रगति को धीमा कर सकते हैं। शर्मा की यह टिप्पणी भारत की वैश्विक AI हब बनने की महत्वाकांक्षाओं और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को चुनौती दे रही स्थानीय पर्यावरणीय चिंताओं के बीच बढ़ती खाई को दर्शाती है।
Google-Adani प्रोजेक्ट पर विवाद
शर्मा के ये बयान विशाखापत्तनम में गूगल और अडानी ग्रुप द्वारा $15 अरब के प्रस्तावित डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के खिलाफ बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बाद आए हैं। स्थानीय कार्यकर्ता और निवासी इस प्रोजेक्ट को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि उनका मानना है कि बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर स्थानीय जल संसाधनों पर दबाव डाल सकते हैं और पास के कंबलकोंडा वन्यजीव अभयारण्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में बैनर और नारों के ज़रिये संसाधन प्रबंधन पर चिंता जताई गई है, जिसमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत और स्थानीय जल उपलब्धता के बीच संतुलन की बात की गई है।
सरकार का पक्ष और वैश्विक ट्रेंड
आंध्र प्रदेश सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट क्षेत्रीय आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है और डेटा सेंटर के लिए पानी का आवंटन आवासीय या ग्रामीण उपयोग के लिए निर्धारित संसाधनों से अलग होगा। वैश्विक स्तर पर भी, बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियां पानी और ऊर्जा की खपत को लेकर जांच के दायरे में हैं। कई कंपनियां अब अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए एडवांस्ड, रीसर्क्युलेटिंग कूलिंग सिस्टम अपना रही हैं, जो नए सर्वर फार्म्स के लिए सामुदायिक स्वीकृति पाने के लिए ज़रूरी है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों के लिए, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर यह बहस भारत में एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution Risk) के विकसित होते स्वरूप को उजागर करती है। बड़े पैमाने के विकास अब उच्च स्तर के पर्यावरणीय और सामाजिक ड्यू डिलिजेंस (Social Due Diligence) के अधीन हैं, जो प्रोजेक्ट की समय-सीमा और कैपिटल एलोकेशन (Capital Allocation) को प्रभावित कर सकते हैं।
Paytm का प्रदर्शन
डिजिटल इकोनॉमी के व्यापक संदर्भ में, पेटीएम (One 97 Communications) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल बदलाव किया है। कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, जिसने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹220 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इससे पहले, फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने पूरे साल ₹552 करोड़ का प्रॉफिट कमाया था। हालिया सत्रों में स्टॉक ने अच्छा प्रदर्शन किया है, जो लगभग ₹1,429 पर कारोबार कर रहा है, और यह अपने 52-हफ्ते के उच्चतम स्तर के करीब है।
आगे की राह
आगे चलकर, निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विशाखापत्तनम डेटा सेंटर जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट स्थानीय नियामक और पर्यावरणीय बाधाओं को बिना किसी महत्वपूर्ण देरी के कैसे पार कर पाते हैं। साथ ही, जैसे-जैसे कंपनियां अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं, उनकी तकनीकी विस्तार के साथ-साथ सामुदायिक संबंधों को प्रबंधित करने की क्षमता उनके परिचालन की गति को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी।
