पेपल (PayPal) के अधिग्रहण (Acquisition) की खबरें तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पेपल फिलहाल स्ट्राइप (Stripe) और प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल (Advent International) के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम के साथ अधिग्रहण को लेकर शुरुआती दौर की बातचीत में है। यह खबर जुलाई 2026 में हुए **$53 बिलियन** के पिछले ऑफर के ठुकराए जाने के बाद आई है। शुक्रवार को संभावित डील की खबरों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया के चलते पेपल के शेयरों में करीब **2%** की तेजी देखी गई, हालांकि, नियामक और एंटीट्रस्ट से जुड़ी बाधाएं इस फाइनल एग्रीमेंट को जटिल बना सकती हैं।
पेपल को खरीदेगा स्ट्राइप और एडवेंट?
पेमेंट दिग्गज पेपल (PayPal Holdings Inc.) के लिए यह एक बड़ा मोड़ हो सकता है। ताजा रिपोर्टों की मानें तो, पेपल फिलहाल अपने प्रतिद्वंद्वी स्ट्राइप (Stripe) और प्राइवेट इक्विटी फर्म एडवेंट इंटरनेशनल (Advent International) के नेतृत्व वाले एक समूह के साथ अधिग्रहण को लेकर एडवांस बातचीत कर रहा है। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है जब फिनटेक कंपनी पिछले कुछ महीनों से बड़े आंतरिक पुनर्गठन (Restructuring) से गुजर रही है।
$53 बिलियन का ऑफर और नई उम्मीदें
यह बातचीत उस कोशिश के बाद हुई है जब जुलाई 2026 में इसी समूह ने $60.50 प्रति शेयर के भाव पर $53 बिलियन के वैल्यूएशन पर पेपल को खरीदने का प्रस्ताव दिया था। उस वक्त पेपल ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। लेकिन, वर्तमान चर्चाएं संकेत देती हैं कि एक नया डील संभव है, शायद बदली हुई वैल्यूएशन पर। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद शुक्रवार को पेपल के शेयर में लगभग 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
CEO की टर्नअराउंड स्ट्रेटेजी
मार्च 2026 में कमान संभालने के बाद से, CEO एनरिक लोरेस (Enrique Lores) कंपनी की धीमी ग्रोथ और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए एक टर्नअराउंड प्लान पर काम कर रहे हैं। इस स्ट्रेटेजी में बिजनेस को तीन मुख्य हिस्सों में बांटना शामिल है: स्टैंडर्ड पेमेंट और चेकआउट सर्विसेज, वेन्मो (Venmo) जैसे कंज्यूमर फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स, और क्रिप्टोकरेंसी पेमेंट सर्विसेज। इस प्लान का एक अहम हिस्सा अगले 2 से 3 सालों में वर्कफोर्स में 20% की कटौती करना भी है, ताकि ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम किया जा सके और कोर टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ाया जा सके।
रेगुलेटरी और एंटीट्रस्ट की चुनौतियां
हालांकि, अधिग्रहण की संभावना ने बाजार में हलचल मचा दी है, लेकिन इसमें कई बड़े जोखिम भी शामिल हैं। सबसे बड़ी बाधा अमेरिका और यूरोप के कंपटीशन रेगुलेटर्स की तरफ से कड़ी जांच की संभावना है। स्ट्राइप और पेपल दोनों ही डिजिटल पेमेंट सेक्टर के बड़े खिलाड़ी हैं, ऐसे में किसी भी मर्जर को एंटीट्रस्ट (Antitrust) की गहन समीक्षा से गुजरना होगा। इसके अलावा, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि यह बातचीत किसी सफल सौदे में तब्दील होगी। अगर यह डील सिरे नहीं चढ़ती है, तो कंपनी के शेयरधारकों के लिए यह अस्थिरता का कारण बन सकती है, खासकर जब कंपनी अपने पुनर्गठन की प्रक्रिया से गुजर रही है।
निवेशक अब इन कंपनियों की तरफ से बातचीत की स्थिति पर आने वाली आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखेंगे। बाजार के लिए मुख्य फोकस यह होगा कि क्या दोनों पक्ष एक ऐसी वैल्यूएशन पर सहमत हो पाते हैं जो शेयरधारकों को संतुष्ट करे और क्या वे इतने बड़े सौदे के लिए जरूरी जटिल रेगुलेटरी रास्ते को पार कर पाते हैं।
