प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। तीन दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में **600** से ज्यादा ग्लोबल एग्जिबिटर्स हिस्सा लेंगे, जो भारत के सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई-चेन के भविष्य की दिशा तय करेंगे।
यह कार्यक्रम 19 सितंबर तक चलेगा और इसमें दुनिया भर के 300 से अधिक इंटरनेशनल प्लेयर्स हिस्सा ले रहे हैं। 'सिलिकॉन टू सिस्टम्स' थीम पर आधारित यह आयोजन चिप डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग के क्षेत्र में भारत की बढ़ती धाक को दुनिया के सामने रखेगा।
Semicon 1.0 से 2.0 का सफर
सरकार अब अपने फोकस को बदल रही है। जहां पहले चरण (Semicon 1.0) में 12 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई थी, वहीं अब सारा जोर Semicon 2.0 के तहत इंडस्ट्रियल इंटीग्रेशन और सप्लाई-चेन को मजबूत बनाने पर है। यह बदलाव दर्शाता है कि सरकार अब केवल सब्सिडी पर निर्भर रहने के बजाय एक सेल्फ-सस्टेनिंग यानी आत्मनिर्भर औद्योगिक आधार तैयार करना चाहती है।
मार्केट का गणित और रिस्क फैक्टर
मौजूदा समय में भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट करीब $50 बिलियन का है, जिसके 2030 तक तेजी से बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, निवेशकों को कुछ जरूरी बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- इंपोर्ट पर निर्भरता: भारत अभी भी चिप्स के लिए आयात पर काफी निर्भर है, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ सकता है।
- कठिन प्रतिस्पर्धा: ताइवान, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे दिग्गजों के साथ मुकाबला करना एक बड़ी चुनौती है, जिनके पास दशकों पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर है।
आने वाले समय में इन 12 स्वीकृत प्रोजेक्ट्स की रफ्तार और स्थानीय मैन्युफैक्चरर्स द्वारा प्रोडक्शन कॉस्ट को मैनेज करने की क्षमता ही सेक्टर की लंबी अवधि की सफलता तय करेगी।
