Oracle और Microsoft ने भारत में अपने ऑपरेशंस में बड़े बदलाव किए हैं। Oracle भारत से करीब **3,000** नौकरियां कम कर रही है, जबकि Microsoft ने **500** के करीब कर्मचारियों को परफॉर्मेंस इंप्रूवमेंट प्लान (PIP) में डाला है। यह बदलाव AI और हाई-एंड इंजीनियरिंग पर फोकस करने की नई रणनीति का हिस्सा है।
भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़ा ट्रांजिशन (Transition) देखने को मिल रहा है। ग्लोबल सॉफ्टवेयर दिग्गज अब AI और क्लाउड कंप्यूटिंग पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वर्कफोर्स को रीकैलिब्रेट कर रहे हैं। सितंबर 2026 तक, Oracle भारत में अपनी हेडकाउंट को करीब 3,000 पोजीशन कम करने की तैयारी में है। यह कदम कंपनी के उस ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है, जिसके तहत मई 2025 से मई 2026 के बीच कंपनी का कुल वर्कफोर्स 162,000 से घटकर 141,000 यानी 13% रह गया था।
इसी बीच, Microsoft ने भी अपने करीब 400 से 500 भारतीय कर्मचारियों को परफॉर्मेंस इंप्रूवमेंट प्लान (PIP) के दायरे में रखा है, जो उनके स्थानीय वर्कफोर्स का लगभग 2% है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनियां अब सेल्स, एडमिन और जनरल इंजीनियरिंग जैसे पुराने रोल्स को हटाकर कैपिटल को AI और स्पेशलाइज्ड टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर की तरफ शिफ्ट कर रही हैं।
मास हायरिंग का दौर खत्म
यह ट्रेंड पारंपरिक IT हायरिंग मॉडल के अंत का संकेत है। अब कंपनियां 'बेंच' (Bench) पर एंप्लॉयीज रखने के बजाय डिमांड-ड्रिवन रिक्रूटमेंट पर जोर दे रही हैं। साइबर सिक्योरिटी, डेटा एनालिटिक्स और जेनरेटिव AI जैसे क्षेत्रों में एक्सपर्ट्स की मांग बढ़ रही है, जबकि फ्रेशर्स के लिए हायरिंग धीमी हो गई है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को इन बदलावों को कंपनी के मार्जिन और कैपिटल एलोकेशन के नजरिए से देखना चाहिए। हालांकि छंटनी से शॉर्ट-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि ये कंपनियां स्पेशलाइज्ड टैलेंट की कमी को कैसे मैनेज करती हैं। भारत में मौजूद ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भी अब बैक-ऑफिस सपोर्ट के बजाय हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग और इनोवेशन हब बनने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
