Oracle ने New Mexico में अपने 'Project Jupiter' डेटा सेंटर के लिए एक 'फोर्स मेजेर' (Force Majeure) क्लॉज लागू कर दिया है। इसका मकसद बढ़ती लागत और संभावित देरी से खुद को सुरक्षित रखना है, जिसके बाद प्री-मार्केट ट्रेडिंग में कंपनी के शेयर **4%** गिर गए हैं।
Oracle ने अपने मेगा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट 'Project Jupiter' के लिए एक कानूनी दांव चला है। इस प्रक्रिया में प्रोजेक्ट डेवलपर 'Blue Owl' भी शामिल है। इस क्लॉज को एक्टिव करने का मतलब यह है कि अगर 2028 की तय डेडलाइन तक प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता है, तो Oracle अपने पेमेंट को टाल सकती है और वित्तीय देनदारियों से बच सकती है।
निवेशकों के लिए यह खबर क्यों अहम है?
यह पूरी तरह से प्रोजेक्ट से बाहर निकलने का रास्ता नहीं है, बल्कि एक सुरक्षा कवच की तरह है। AI के लिए विशाल डेटा सेंटर बनाना बेहद खर्चीला और जटिल काम है। इस क्लॉज का इस्तेमाल करके कंपनी ने यह सुनिश्चित किया है कि अगर निर्माण में देरी होती है या लागत बेकाबू होती है, तो कंपनी का वित्तीय जोखिम सीमित रहे।
बाजार ने इस खबर पर तुरंत प्रतिक्रिया दी है और प्री-मार्केट सेशन में शेयर 4% नीचे गिर गए हैं। दरअसल, मार्केट इस बात को लेकर काफी संवेदनशील है कि टेक दिग्गज कंपनियां इंफ्रास्ट्रक्चर पर कितना और कैसे खर्च कर रही हैं। Oracle के लिए डेटा सेंटर बनाना जरूरी है, लेकिन इसमें अरबों डॉलर का कैपिटल खर्च होता है, इसलिए किसी भी देरी से कंपनी की कार्यकुशलता पर सवाल उठने लगते हैं।
क्या है एग्जीक्यूशन रिस्क?
ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स में अक्सर सप्लाई चेन, लेबर कॉस्ट और परमिट मिलने में देरी जैसी समस्याएं आती हैं। 'फोर्स मेजेर' क्लॉज कंपनी को अनपेक्षित स्थितियों में अपनी जिम्मेदारियों को रोकने का अधिकार देता है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि Oracle अपने कैपिटल एलोकेशन को लेकर काफी सतर्क हो गई है। अब नजर इस बात पर होगी कि कंपनी इस प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और बजट को लेकर आगे क्या स्पष्टीकरण देती है।
