OpenAI ने अपना नया 'GPT-6 Cyber' मॉडल पेश किया है, जो सॉफ्टवेयर में कमियों को ढूंढकर उन्हें फिक्स करेगा। Linux और Firefox पर इसकी सफल टेस्टिंग हो चुकी है, लेकिन इसका भारी खर्च निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।
सुरक्षा में AI की नई क्रांति
OpenAI ने अपने नए 'GPT-6 Cyber' मॉडल को 'Daybreak Red' प्रोग्राम के जरिए चुनिंदा संस्थाओं के लिए जारी किया है। यह मॉडल मैन्युअल कोड रिव्यू के बजाय AI-आधारित एनालिसिस का उपयोग करता है, जो बेहद तेजी से सिस्टम को स्कैन और रिपेयर करने में सक्षम है। टेस्ट के दौरान, इस मॉडल ने Linux कर्नल में 948 और Firefox ब्राउज़र में 81 कमियों को खोजकर उनके पैच भी तैयार कर दिए।
IT सेक्टर के लिए चुनौती और अवसर
भारतीय IT कंपनियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है। ये कंपनियां वैश्विक ग्राहकों को साइबर सुरक्षा सेवाएं देती हैं, लेकिन इस तकनीक को अपनाना महंगा साबित हो सकता है। डेटा के मुताबिक, एक सिंगल ऑटोमेटेड पाइपलाइन चलाने की लागत लगभग $1.21 मिलियन (API क्रेडिट्स) आती है, जिससे मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। OpenAI ने इस सुरक्षा को बढ़ाने के लिए $1 बिलियन का 'Daybreak for Frontline Defenders' फंड भी घोषित किया है।
'Dual-Use' जोखिम और सतर्कता
इस तकनीक का 'Dual-Use' पहलू चिंता का विषय है, क्योंकि जिस AI से कमियां ठीक की जा सकती हैं, उसी का दुरुपयोग हैकर्स भी कर सकते हैं। इसे देखते हुए OpenAI ने बेहद सख्त सुरक्षा गार्डरेल्स और आईपी (IP) प्रोटोकॉल लागू किए हैं। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि कैसे सिक्योरिटी सर्विस कंपनियां अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट और क्लाइंट की मांग के बीच संतुलन बनाए रखती हैं।
