एक रिसर्च टीम ने Anthropic के Claude 3.5 Opus का इस्तेमाल कर OpenAI के इंटरनल सिस्टम तक पहुंच बनाई है। हालांकि यह एक आधिकारिक बग-बाउंटी प्रोग्राम के तहत हुआ और खामी को ठीक कर दिया गया है, लेकिन यह घटना दिखाती है कि कैसे AI अब साइबर हमलों को कहीं ज्यादा आसान और तेज बना रहा है।
हमले की जड़ क्या थी?
यह सेंधमारी OpenAI के मुख्य AI मॉडल्स में नहीं, बल्कि उनके कम्युनिटी फोरम के लिए इस्तेमाल होने वाले थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म 'Discourse' में थी। रिसर्चर्स ने Discourse में मौजूद 'libheif' टूल के एक पुराने वर्जन में मेमोरी बग ढूंढा। इस बग का कोई औपचारिक 'CVE' (Common Vulnerabilities and Exposures) रिकॉर्ड न होने के कारण यह सिस्टम में अनपैच्ड (Unpatched) पड़ा था, जो एक बड़ा 'ब्लाइंड स्पॉट' साबित हुआ।
AI ने कैसे बदली साइबर अटैक की रफ्तार?
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू हमले की स्पीड है। पहले के AI मॉडल्स सर्वर तक पहुंचने का रास्ता खोजने में नाकाम रहे थे, लेकिन Claude 3.5 Opus ने सिर्फ कुछ घंटों के भीतर वह कोड तैयार कर दिया, जिसे बनाने में पहले महीनों की मेहनत लगती थी।
टेक जगत के लिए बड़ा सबक
यह घटना साइबर सिक्योरिटी के लिए एक चेतावनी है। अब कंपनियों को सिर्फ अपने सॉफ्टवेयर पर ही नहीं, बल्कि उन पर निर्भर हर थर्ड-पार्टी वेंडर और ओपन-सोर्स लाइब्रेरी पर भी नजर रखनी होगी। जानकारों का मानना है कि अब कंपनियों को अपनी साइबर सुरक्षा पर खर्च बढ़ाना होगा और सॉफ्टवेयर सप्लाई चेन की सख्ती से जांच करनी होगी। OpenAI ने पुष्टि की है कि 27 जुलाई को ही इस खामी को पूरी तरह ठीक कर दिया गया था, लेकिन यह वाकया टेक कंपनियों के बदलते रिस्क प्रोफाइल को साफ दर्शाता है।
