OpenAI, Anthropic और Google DeepMind ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े खतरों को रोकने के लिए नई सुरक्षा नीतियों पर चर्चा शुरू की है। इसी बीच, OpenAI ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 2026 में अपना IPO नहीं लाएगा।
दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों के बीच एक बड़ा गठजोड़ देखने को मिल रहा है। OpenAI, Anthropic और Google DeepMind के अधिकारी पिछले कुछ हफ्तों से एक ऐसे 'स्टैंडर्ड्स बॉडी' को बनाने पर बातचीत कर रहे हैं, जो एडवांस्ड AI मॉडल्स की टेस्टिंग और ऑडिटिंग की निगरानी कर सके। इस कदम का मुख्य उद्देश्य AI से जुड़े संभावित बड़े खतरों को समय रहते टालना है।
OpenAI की रणनीति में बड़ा बदलाव
OpenAI के ग्लोबल पॉलिसी चीफ क्रिस लेहने ने पुष्टि की है कि कंपनियां सुरक्षा फ्रेमवर्क बनाने पर काम कर रही हैं। लेकिन इस बातचीत के साथ ही कंपनी ने निवेशकों के लिए एक बड़ा अपडेट दिया है—OpenAI ने आधिकारिक तौर पर 2026 में IPO लाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। कंपनी अब पब्लिक लिस्टिंग के बजाय लंबे समय के गवर्नेंस और सेफ्टी पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इसके उलट, Anthropic अभी भी 2026 तक पब्लिक होने की राह पर है। कंपनी का मौजूदा तिमाही के लिए एडजस्टेड ऑपरेटिंग प्रॉफिट का अनुमान सकारात्मक बना हुआ है, जो उसे एक अलग दिशा में ले जा रहा है।
क्या है कॉम्पिटिशन और एंटी-ट्रस्ट का रिस्क?
भले ही इन कंपनियों का मकसद सुरक्षा है, लेकिन मार्केट एक्सपर्ट्स को डर है कि ये नियम 'कार्टेल' जैसा व्यवहार न करने लगें। अगर ये कंपनियां मिलकर सख्त नियम बनाती हैं, तो इससे छोटे खिलाड़ियों (AI startups) के लिए मार्केट में टिकना मुश्किल हो जाएगा और प्रवेश बाधाएं (barriers to entry) बढ़ सकती हैं।
रेगुलेटर्स इस बात पर बारीक नजर रखे हुए हैं कि क्या ये साझा प्रयास प्रतिस्पर्धा को कम करेंगे। अगर सरकार को लगा कि इन कंपनियों ने मार्केट में 'आउटपुट रिस्ट्रिक्शन' लगाया है, तो एंटी-ट्रस्ट जांच का खतरा बढ़ सकता है। इससे न केवल इनोवेशन की रफ्तार धीमी हो सकती है, बल्कि टेक्नोलॉजी स्टॉक्स और सेमीकंडक्टर शेयरों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
