OpenAI: सुरक्षा को लेकर घिरी कंपनी, कर्मचारियों का गंभीर आरोप

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
OpenAI: सुरक्षा को लेकर घिरी कंपनी, कर्मचारियों का गंभीर आरोप

OpenAI में सुरक्षा को लेकर भारी आंतरिक कलह मची है। कर्मचारियों का कहना है कि कंपनी ने डेटा प्रोटेक्शन के बजाय तेजी से डेवलपमेंट पर ध्यान दिया। अक्टूबर में एक इंजीनियर की जासूसी के आरोप में गिरफ्तारी के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है, जो पूरे AI सेक्टर के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

OpenAI फिलहाल एक मुश्किल दौर से गुजर रही है। कंपनी के भीतर सुरक्षा को लेकर कर्मचारी खासे नाराज हैं। आरोप है कि Google और Anthropic जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलने की दौड़ में OpenAI ने सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया। हालांकि OpenAI अभी एक प्राइवेट कंपनी है और शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है, लेकिन इसके गवर्नेंस पर उठते सवाल ग्लोबल टेक इन्वेस्टर्स के लिए चिंता का विषय हैं।

रफ्तार बनाम सुरक्षा

विवाद की जड़ कंपनी का 'मोनोरेपो' (monorepo) स्ट्रक्चर है, जहां सारा डेटा और कोड एक ही जगह स्टोर था। कर्मचारियों का दावा है कि इस ढांचे के कारण कई कर्मचारी उन संवेदनशील जानकारियों तक पहुंच बना लेते थे, जिनकी उन्हें जरूरत नहीं थी। हालांकि कंपनी का कहना है कि मॉडल वेट जैसे अहम एसेट्स सुरक्षित थे, लेकिन सुरक्षा को लेकर यह ढिलाई कंपनी के लिए गले की फांस बन गई है।

जासूसी का मामला

अक्टूबर 2026 में चीजें तब और बिगड़ गईं जब कंपनी के इंजीनियर अब्दुल रहमान अलफोजान को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाया और कंपनी के ही AI टूल्स का इस्तेमाल अधिकारियों के सऊदी अरब दौरे की जानकारी निकालने के लिए किया। इस घटना ने साबित कर दिया कि OpenAI का एकेडमिक रिसर्च कल्चर कॉर्पोरेट जासूसी के खतरे से निपटने के लिए तैयार नहीं था।

अब क्या बदलाव कर रही है कंपनी?

अपनी गलतियों को सुधारने के लिए OpenAI ने बड़े बदलाव शुरू किए हैं। कंपनी ने अपने लगभग 25% प्रोडक्शन इंजीनियर्स को अब केवल इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी पर काम करने के लिए शिफ्ट कर दिया है। इसके अलावा, Dane Stuckey को चीफ इंफॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) के रूप में नियुक्त किया गया है, ताकि सुरक्षा में आ रही खामियों को दूर किया जा सके।

AI सेक्टर पर असर

निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि AI कंपनियों की राह आसान नहीं है। बढ़ती सुरक्षा जरूरतों का मतलब है कि इन कंपनियों का खर्चा बढ़ेगा और डेवलपमेंट की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या ये कंपनियां इनोवेशन की दौड़ और डेटा सुरक्षा के बीच तालमेल बिठा पाएंगी या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.