फिनटेक कंपनी One Mobikwik Systems ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में ₹7.6 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले साल की समान अवधि में हुए ₹41 करोड़ के घाटे से एक बड़ी रिकवरी है। कंपनी का रेवेन्यू भी **4%** बढ़कर ₹281 करोड़ हो गया, जिसका मुख्य कारण लेंडिंग ऑपरेशंस के खर्चों में भारी कटौती रही। इस वित्तीय सुधार के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिला NBFC लाइसेंस भी एक अहम फैक्टर है।
कैसा रहा कंपनी का प्रदर्शन?
One Mobikwik Systems ने अपने वित्तीय प्रदर्शन में शानदार उलटफेर किया है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के लिए ₹7.6 करोड़ का नेट प्रॉफिट घोषित किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹41 करोड़ का घाटा हुआ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू पिछले साल की इसी तिमाही के ₹271 करोड़ से बढ़कर 4% की वृद्धि के साथ ₹281 करोड़ पर पहुंच गया है।
मुनाफे की वजह?
कंपनी के मुनाफे में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण परिचालन खर्चों, खासकर लेंडिंग सेगमेंट में आई भारी कमी है। तिमाही के लिए लेंडिंग ऑपरेशनल खर्च घटकर सिर्फ ₹2 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹30 करोड़ था। इसके अलावा, कंपनी का EBITDA ₹8 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹42 करोड़ के EBITDA लॉस की तुलना में एक मजबूत सुधार दिखाता है। यह कंपनी की परिचालन दक्षता में स्थिरता का संकेत है।
NBFC लाइसेंस का असर
कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति के लिए हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा उसकी सब्सिडियरी, MobiKwik Financial Services को दिया गया NBFC लाइसेंस अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रेगुलेटरी अप्रूवल कंपनी के क्रेडिट बिजनेस के लिए एक बड़ा कदम है। अपने रेगुलेटेड लेंडिंग आर्म के जरिए, कंपनी अपनी क्रेडिट ऑपरेशंस को आंतरिक रूप से संचालित करने का लक्ष्य रखती है। इससे नए लोन प्रोडक्ट्स लॉन्च करने और भविष्य में प्रॉफिट मार्जिन सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है।
MobiKwik की सब्सिडियरी कंज्यूमर्स और छोटे व्यवसायों के लिए सिक्योरड और अन-सिक्योरड दोनों तरह के लेंडिंग पर फोकस करेगी, खासकर उन सेगमेंट्स पर जो अभी भी पारंपरिक बैंकिंग से वंचित हैं। लाइसेंस मिल गया है, लेकिन कंपनी को अपनी क्रेडिट लेंडिंग सेवाओं को पूरी तरह से शुरू करने के लिए अंतिम रेगुलेटरी शर्तों को पूरा करना होगा।
निवेशकों की गतिविधि
साल भर से कंपनी के शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। अप्रैल के अंत में, प्रमुख वेंचर कैपिटल निवेशक Peak XV Partners ने कंपनी से अपना एग्जिट (Exit) किया। फर्म ने लगभग 60.8 लाख शेयर बेचे, जो कंपनी की कुल इक्विटी का लगभग 7.7% था। ये शेयर औसतन ₹214 प्रति शेयर की दर से बेचे गए, जिनकी कुल कीमत ₹130 करोड़ से अधिक थी। इस डील के खरीदारों में Florintree Advisors, Viridian Asset Management, Dymon Asia और Karma Capital जैसे इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स शामिल थे।
लेटेस्ट नतीजों के ऐलान के बाद, NSE पर शेयर 2.13% बढ़कर ₹209.59 पर ट्रेड कर रहा था। निवेशक अब इस बात पर नजर रखेंगे कि कंपनी नए NBFC फ्रेमवर्क के तहत अपनी लेंडिंग रणनीति को कैसे लागू करती है। मुख्य निगरानी का विषय यह रहेगा कि कंपनी कितनी तेजी से अपने क्रेडिट ऑपरेशंस को बढ़ा पाती है और भारत के प्रतिस्पर्धी फिनटेक परिदृश्य में नेविगेट करते हुए अपने बेहतर प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख पाती है या नहीं।
