पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Barack Obama ने मौजूदा प्रशासन की AI पॉलिसी का विरोध किया है। उन्होंने टेक कंपनियों के स्वैच्छिक मानकों के बजाय सख्त फेडरल रेगुलेशन की मांग की है, जिससे भविष्य में टेक इंडस्ट्री के लिए नियम और भी कड़े हो सकते हैं।
नियम बनाम स्वैच्छिक मानक (Voluntary Standards)
कोल्गेट यूनिवर्सिटी में एक इवेंट के दौरान Barack Obama ने साफ कर दिया कि केवल मार्केट कॉम्पिटिशन के भरोसे AI सेफ्टी को नहीं छोड़ा जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि टेक कंपनियां अपनी मर्जी से जो मानक तय कर रही हैं, वे सुरक्षा के लिहाज से नाकाफी हैं।
एयरलाइंस और फार्मा जैसा रेगुलेशन?
Obama का सीधा कहना है कि जिस तरह से Aviation, Pharmaceuticals और Food production जैसे सेक्टर में सख्त सरकारी निगरानी होती है, ठीक वैसा ही मॉडल AI के लिए अपनाना जरूरी है। अगर सरकार ऐसी बाध्यकारी नीतियां लाती है, तो इसका असर टेक कंपनियों के R&D बजट और उनके प्रोडक्ट्स के डिप्लॉयमेंट पर पड़ना तय है।
'Agentic AI' पर बड़ा सवाल
पूर्व राष्ट्रपति ने विशेष रूप से Agentic AI यानी ऐसे ऑटोनॉमस सिस्टम पर चिंता जताई है, जो बिना मानवीय दखल के इंटरनेट पर फैसले ले सकते हैं। उन्होंने इसे महज 'मार्केटिंग और कॉम्पिटिटिव प्रेशर' करार देते हुए सवाल किया कि क्या हमें वाकई ऐसे सिस्टम की जरूरत है जो पूरी तरह आजाद हों।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
यह राजनीतिक बयानबाजी टेक सेक्टर में बढ़ते 'रेगुलेटरी रिस्क' की ओर इशारा करती है। फिलहाल टेक कंपनियां हल्के नियमों के पक्ष में हैं, लेकिन अगर राजनीतिक दबाव बढ़ता है, तो कंपनियों की कार्यप्रणाली में बदलाव के साथ-साथ उनके प्रोजेक्ट टाइमलाइन्स पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले समय में कड़े अनुपालन (Compliance) नियमों के लिए तैयार रहना होगा।
