Nvidia अपने AI क्लाउड कस्टमर्स को भारी-भरकम वित्तीय मदद दे रही है। कंपनी चिप सप्लायर के साथ-साथ अब फाइनेंसर की भूमिका में भी है, जो ग्रोथ तो बढ़ा रहा है लेकिन भविष्य के लिए बड़े जोखिम भी पैदा कर रहा है।
क्या है Nvidia का 'वेंडर फाइनेंसिंग' प्लान?
Nvidia ने अपने AI चिप्स को इंडस्ट्री स्टैंडर्ड बनाए रखने के लिए एक आक्रामक वित्तीय रणनीति अपनाई है। कंपनी सिर्फ हार्डवेयर नहीं बेच रही, बल्कि अपने सबसे बड़े क्लाउड-सर्विस ग्राहकों के लिए एक बड़े फाइनेंसर के तौर पर उभर रही है। रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने अपने ग्राहकों के लिए कुल $288 बिलियन का सपोर्ट नेटवर्क तैयार किया है। इसमें इक्विटी इन्वेस्टमेंट, आसान पेमेंट शर्तें और अरबों डॉलर की गारंटी शामिल हैं, ताकि ये क्लाउड प्रोवाइडर्स डेटा सेंटर का निर्माण जारी रख सकें।
रिस्क का गणित: 'बायर ऑफ लास्ट रिसॉर्ट'
यह रणनीति एक 'सर्कुलर डिपेंडेंसी' बना रही है। Nvidia उन्हीं ग्राहकों को फंड दे रही है जो बदले में उसके ही प्रोडक्ट्स खरीदते हैं। इससे कंपनी शॉर्ट टर्म में अपनी सेल्स तो सुरक्षित कर रही है, लेकिन अगर क्लाउड प्रोवाइडर्स मुश्किल में आते हैं, तो इसका सीधा असर Nvidia के रेवेन्यू और एसेट्स पर पड़ेगा। सबसे बड़ा खतरा 'बायर ऑफ लास्ट रिसॉर्ट' (Buyer of last resort) वाला है, जहां Nvidia ने कमिटमेंट किया है कि अगर पार्टनर कैपेसिटी लीज पर नहीं दे पाए, तो वह खुद उसे खरीदेगी। अगर AI की डिमांड कम हुई, तो यह Nvidia के लिए एक भारी लायबिलिटी बन सकती है।
क्या 90 के दशक का इतिहास दोहराया जा रहा है?
मार्केट एनालिस्ट इस स्थिति की तुलना 1990 के दशक के टेलीकॉम बूम से कर रहे हैं। उस समय भी टेलीकॉम कंपनियों ने ऐसी ही आक्रामक फाइनेंसिंग की थी, जो बाद में बड़ी गिरावट का कारण बनी। हालांकि, Nvidia की स्थिति फिलहाल मजबूत है और उसने पिछले फाइनेंशियल ईयर में $118 बिलियन का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, लेकिन मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) का मानना है कि इन फाइनेंसिंग डील्स की अपारदर्शिता के कारण रिस्क का सटीक अंदाजा लगाना मुश्किल है। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि क्लाउड कस्टमर्स अपने डेटा सेंटर्स से कमाई कैसे करते हैं, क्योंकि यही आगे चलकर Nvidia के मुनाफे की असल परीक्षा होगी।
