Climate Week NYC के दौरान Nvidia के सस्टेनेबिलिटी लीड को प्रदर्शनकारियों का सामना करना पड़ा। AI हार्डवेयर को ठंडा रखने के लिए पानी की भारी खपत पर सवाल उठाए गए, जिसका सीधा कनेक्शन भारत के डेटा सेंटर हब्स में पानी की कमी से जोड़ा जा रहा है।
भारी पानी की खपत पर प्रदर्शन
न्यूयॉर्क में आयोजित 'Climate Week NYC' के दौरान Nvidia के सस्टेनेबिलिटी हेड जोश पार्कर को 'Sunrise Movement' के कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा। विरोध का मुख्य मुद्दा AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती रफ्तार के साथ जुड़ा 'पर्यावरणीय संकट' है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए जिस तरह पानी का बेतहाशा इस्तेमाल हो रहा है, वह स्थानीय समुदायों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
भारत में बढ़ता खतरा
भारत में डेटा सेंटर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है, खासकर बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में। इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, 1 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर सालाना लगभग 2.5 करोड़ लीटर पानी सोख लेता है। भारत की मौजूदा डेटा सेंटर क्षमता 1.5 गीगावाट है, जो 2030 तक तेजी से बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में स्थानीय जल निकायों और म्युनिसिपल सप्लाई पर बड़ा दबाव पड़ना तय है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
AI के इस दौर में अब कंपनियां सिर्फ मुनाफे पर नहीं, बल्कि 'सस्टेनेबिलिटी' पर भी परखी जा रही हैं। निवेशकों के लिए अब यह एक बड़ा 'मॉनिटरेबल' फैक्टर बन गया है कि कंपनियां रिसोर्स मैनेजमेंट और सरकारी रेगुलेशंस के बीच कैसा तालमेल बैठाती हैं। अगर कंपनियां अपनी कूलिंग टेक्नोलॉजी को कुशल नहीं बनाती हैं, तो भविष्य में उन्हें रेगुलेटरी बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है, जिसका सीधा असर उनके ऑपरेशनल खर्च और स्टॉक पर दिख सकता है।
