नॉर्वे के 10 मीडिया संगठनों ने ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वे Meta द्वारा अपनी पत्रकारिता को बिना अनुमति और बिना भुगतान के AI ट्रेनिंग में इस्तेमाल करने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।
ओस्लो डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हुई इस कानूनी कार्रवाई में NRK, Schibsted, Amedia, Polaris, Aller और NTB जैसे बड़े संस्थान शामिल हैं। मुद्दा यह है कि Meta ने अपनी नई सर्विस शर्तों के जरिए पत्रकारों के कंटेंट, जिसमें पेवल्ड आर्टिकल्स भी शामिल हैं, उन्हें बिना किसी मुआवजे के अपने AI मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी।
क्यों है विवाद?
प्रकाशकों का कहना है कि उनकी मेहनत और ओरिजिनल कंटेंट का इस्तेमाल कर Meta ऐसे AI टूल्स तैयार कर रहा है जो अंततः उन्हीं मीडिया आउटलेट्स के साथ विज्ञापन और पाठकों के लिए मुकाबला करेंगे। इसे वे बाजार में हेरफेर और स्वतंत्र पत्रकारिता की आर्थिक स्थिति के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।
टेक निवेशकों के लिए रिस्क
ग्लोबल स्तर पर यह सिर्फ एक केस नहीं है, बल्कि AI भविष्य की एक बड़ी चुनौती है। OpenAI, Google और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियां भी ऐसे ही कॉपीराइट मुकदमों का सामना कर रही हैं। यदि अदालतें प्रकाशकों के पक्ष में फैसला सुनाती हैं, तो डेटा हासिल करने की लागत काफी बढ़ सकती है, जो सीधे तौर पर इन टेक कंपनियों के ऑपरेटिंग कॉस्ट को बढ़ाएगा और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डालेगा।
फिलहाल, निवेशकों को इस मामले पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह यूरोप में डेटा स्क्रैपिंग और कॉपीराइट अधिकारों पर भविष्य की कानूनी दिशा तय करने वाला एक 'बेलवेदर' साबित हो सकता है।
