Norway Smart Glasses: प्राइवेसी के लिए खतरा बनी Smart Glasses! नॉर्वे ने लगाया बैन का प्रस्ताव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Norway Smart Glasses: प्राइवेसी के लिए खतरा बनी Smart Glasses! नॉर्वे ने लगाया बैन का प्रस्ताव

नॉर्वे सरकार ने अब स्कूलों और हेल्थकेयर सेंटर्स जैसी संवेदनशील जगहों पर AI-इनेबल्ड Smart Glasses पर अस्थायी रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। डिजिटल मिनिस्टर का यह सख्त कदम यूरोप में वियरेबल कैमरा टेक्नोलॉजी के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है, जो बड़े मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक बड़ा मार्केट रिस्क बन सकता है।

नॉर्वे सरकार ने 5 अक्टूबर 2026 को एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका मकसद चुनिंदा सार्वजनिक और संवेदनशील स्थानों पर कैमरा-इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेज के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगाना है। डिजिटल मिनिस्टर Torgeir Micaelsen ने यह कदम बिना सहमति के वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी से जुड़ी प्राइवेसी चिंताओं को देखते हुए उठाया है। इस प्रस्ताव को अब देश की संसद (Storting) में भेजा जाएगा ताकि वियरेबल AI डिवाइस के रेगुलेशन पर एक विस्तृत बहस हो सके।

किन जगहों पर होगी पाबंदी?

यह पूरी तरह से बैन नहीं है, लेकिन उन जगहों को टारगेट किया गया है जहाँ प्राइवेसी की उम्मीद ज्यादा होती है। इनमें स्कूल, किंडरगार्टन, प्लेग्राउंड, हेल्थकेयर फैसिलिटीज और जिम के चेंजिंग रूम शामिल हैं। सरकार पार्क, बीच, म्यूजियम और शॉपिंग सेंटर जैसी जगहों पर भी पाबंदी पर विचार कर रही है। सरकार इसके लिए एक एक्सपर्ट ग्रुप भी बनाएगी जो तय करेगा कि क्या भविष्य में इसे परमानेंट करना चाहिए या नहीं।

कंपनियों के लिए बड़ा झटका

टेक्नोलॉजी कंपनियों और उनके निवेशकों के लिए यह खबर एक बड़ा 'रेगुलेटरी रिस्क' लेकर आई है। हालाँकि कंपनियों ने कैमरा एक्टिव होने पर इंडिकेटर लाइट जैसे फीचर्स दिए हैं, लेकिन रेगुलेटर्स का मानना है कि प्राइवेसी के लिए यह काफी नहीं है। इसका असर मार्केट पर भी दिखने लगा है। उदाहरण के तौर पर, यूरोपीय आईवियर रिटेलर Hans Anders ने स्मार्ट ग्लासेज की बिक्री अस्थायी रूप से रोक दी है।

क्या Meta पर पड़ेगा असर?

यह विवाद वियरेबल टेक और डेटा प्राइवेसी कानूनों के बीच के बढ़ते टकराव को दिखाता है। निवेशकों की नजरें अब अंतिम रेगुलेशन पर टिकी हैं। अगर एक्सपर्ट ग्रुप ने रिकॉर्डिंग या फेशियल रिकग्निशन फीचर्स को डिसेबल करने जैसे सख्त नियम लागू किए, तो Meta जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए ग्लोबल सेल्स और प्रोडक्ट यूटिलिटी पर गहरा असर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.