अमेरिकी अधिकारियों ने एक बड़े साइबर घोटाले का भंडाफोड़ किया है, जिसमें नॉर्थ कोरियाई ऑपरेटिव्स 'लैपटॉप फार्म' के जरिए अमेरिकी कंपनियों में फर्जी IT वर्कर बनकर घुसपैठ कर रहे थे। 'Operation Lonestar Roundup' के नाम से हुए इस खुलासे ने रिमोट वर्किंग की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो सीधे तौर पर आईटी कंपनियों और उनके निवेशकों को प्रभावित कर सकते हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने 'Operation Lonestar Roundup' के तहत एक बहुत बड़े साइबर-जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। टेक्सास में 40 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी कर 187 कंप्यूटर और लैपटॉप जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल नॉर्थ कोरियाई एजेंट फर्जी पहचान बनाकर 70 से अधिक अमेरिकी कंपनियों में हाई-पेइंग रिमोट IT जॉब हासिल करने के लिए कर रहे थे।
कैसे काम करता था यह 'लैपटॉप फार्म'?
हैकर्स ने कंपनियों के सिक्योरिटी चेक्स को चकमा देने के लिए 'लैपटॉप फार्म' बनाए थे। ये अमेरिका में स्थित फिजिकल ठिकाने थे, जहाँ दर्जनों लैपटॉप को लोकल रेजिडेंशियल नेटवर्क से जोड़ दिया गया था। इससे ऐसा लगता था कि कर्मचारी अमेरिका के किसी घर से काम कर रहा है, जिससे कंपनियां जियो-फेंसिंग और IP-एड्रेस ट्रैकिंग में धोखा खा गईं।
CrowdStrike जैसी सिक्योरिटी फर्मों ने 'Famous Chollima' नाम के इस ग्रुप की पहचान की है, जिसने इस नेटवर्क के जरिए करीब $3 मिलियन (करीब 25 करोड़ रुपये) जुटाए। यह पैसा नॉर्थ कोरिया के विवादास्पद न्यूक्लियर प्रोग्राम को फंड करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। यह घुसपैठ 17 अमेरिकी राज्यों में फैली थी, जिसमें हेल्थकेयर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे संवेदनशील सेक्टर भी शामिल रहे।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
IT और आउटसोर्सिंग सेक्टर में निवेश करने वाले लोगों के लिए यह एक वेक-अप कॉल है। अब कंपनियों को 'Know Your Employee' (KYE) प्रोटोकॉल को और कड़ा करना होगा। भविष्य में कंपनियों का ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें AI-आधारित वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। अगर कोई कंपनी अनजाने में भी ऐसे तत्वों को काम पर रखती है, तो उस पर भारी रेगुलेटरी जुर्माना और उसकी साख (Reputation) को बड़ा नुकसान हो सकता है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
आने वाले समय में कंपनियों की ओर से साइबर सुरक्षा में किए जाने वाले निवेश और रिमोट-वर्किंग पॉलिसी में बदलाव पर नजर रखें। यदि कंपनियां अपने तिमाही नतीजों में 'Compliance' खर्च बढ़ाती हैं, तो यह संकेत है कि वे अपनी सुरक्षा को और मजबूत कर रही हैं। मुख्य चुनौती यह होगी कि क्या कंपनियां कॉस्ट एफिशिएंसी को बरकरार रखते हुए अपना डेटा और प्रोजेक्ट्स सुरक्षित रख पाएंगी।
