स्थिरता और उत्तराधिकार की कमान
Nandan Nilekani का नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर वापसी करना, कंपनी में स्थिरता लाने की एक बड़ी कवायद है। 2017 में जब कंपनी लीडरशिप विवादों में फंसी थी, तब Nilekani ने कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में Infosys की कमाई $20 बिलियन के पार पहुंच गई। लेकिन, अब उनके कार्यकाल की भी एक सीमा है, क्योंकि 75 साल की उम्र के बाद वे पद पर नहीं रह सकते। विश्लेषकों का मानना है कि उनका तीसरा कार्यकाल कंपनी को एक नया लीडर चुनने के लिए समय देगा, ताकि IT सेक्टर में अक्सर देखे जाने वाले अचानक लीडरशिप बदलने के झटके से Infosys बच सके।
लीडरशिप में बड़ा फेरबदल
Nitin Paranjpe का नॉन-एग्जीक्यूटिव वाइस चेयरमैन बनना बोर्ड के लिए एक मजबूत कदम है। Unilever और Heineken जैसे बड़े ग्लोबल नामों के साथ काम कर चुके Paranjpe, Infosys को AI-आधारित सर्विसेज की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह कदम CEO Salil Parekh के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच आया है। Parekh का मौजूदा टर्म 2027 की शुरुआत में खत्म हो रहा है और वे पहले ही एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के लिए तय रिटायरमेंट एज को पार कर चुके हैं। ऐसे में, बोर्ड एक सुनियोजित तरीके से बदलाव की तैयारी कर रहा है। ऐसी उम्मीद है कि Parekh को कुछ समय के लिए कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाया जा सकता है, ताकि बिना किसी बाजार अस्थिरता के नए CEO की तलाश पूरी हो सके।
कंपनी के सामने ये हैं खतरे
हालांकि कंपनी में अभी स्थिरता दिख रही है, लेकिन कुछ गंभीर चुनौतियां भी हैं। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि Mohit Joshi और Ravi Kumar S. जैसे बड़े लीडर्स के दूसरी कंपनियों में जाने के बाद, Infosys के अंदर लीडरशिप का बेंच (Bench) कमजोर होता दिख रहा है। Tata Consultancy Services (TCS) के विपरीत, जहाँ लीडर्स की एक मजबूत पाइपलाइन है, Infosys को बाहरी टैलेंट पर निर्भर रहना पड़ता है। यह कंपनी के लिए सांस्कृतिक इंटीग्रेशन (Cultural Integration) के जोखिम पैदा करता है। इसके अलावा, कंपनी का FY27 का गाइडेंस भी सतर्क है, जो लगातार बढ़ती प्राइसिंग प्रेशर (Pricing Pressure) और पारंपरिक टाइम-एंड-मैटेरियल्स (Time-and-materials) कॉन्ट्रैक्ट से AI-आधारित डिलीवरी मॉडल में बदलाव को दर्शाता है। अगर कंपनी इस बदलाव के दौरान मार्जिन को ठीक से मैनेज नहीं कर पाती है, तो इसका वैल्यूएशन (Valuation) खतरे में पड़ सकता है।
सेक्टर का हाल और Infosys की पोजीशन
पूरा IT सेक्टर फिलहाल डिमांड में अनिश्चितता का सामना कर रहा है। इसके बावजूद, Infosys की परफॉरमेंस मजबूत बनी हुई है। हालिया इंस्टीट्यूशनल बाइंग (Institutional Buying) और वॉल्यूम में उछाल इसके संकेत दे रहे हैं। जैसे-जैसे कंपनी अपनी 45वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) की तैयारी कर रही है, निवेशकों की नजरें बोर्ड की पारदर्शिता और गवर्नेंस पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि Infosys इन छोटी-मोटी दिक्कतों के बीच खुद को भविष्य की टेक्नोलॉजी के लिए कैसे तैयार करती है।
