Zerodha के सह-संस्थापक Nikhil Kamath ने भारत की एनर्जी ट्रांजिशन पर बड़ी बात कही है। उन्होंने EV मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करने के बजाय बैटरी प्रोडक्शन पर जोर दिया है। खास तौर पर, उन्होंने सोडियम-आयन बैटरी की क्षमता पर प्रकाश डाला, जो भारत के 2-पहिया और 3-पहिया वाहनों के लिए लागत कम कर सकती है और सुरक्षा बढ़ा सकती है, साथ ही लिथियम-आयन के खतरों से भी आगाह किया है।
EV मैन्युफैक्चरिंग या बैटरी सप्लाई चेन: भारत को क्या चुनना चाहिए?
Zerodha के को-फाउंडर Nikhil Kamath ने हाल ही में भारत की एनर्जी ट्रांजिशन (Energy Transition) को लेकर एक अहम चर्चा छेड़ी है। उन्होंने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) मैन्युफैक्चरिंग पर पारंपरिक फोकस को चुनौती देते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत को EV ब्रांड्स बनाने चाहिए या फिर बैटरी सप्लाई चेन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इंडस्ट्री-फोक्स्ड इस डायलॉग में, Kamath ने ग्लोबल बैटरी एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया।
इस बातचीत का मुख्य निष्कर्ष यही रहा कि भारत को इंपोर्टेड लिथियम (Lithium) और दुर्लभ पृथ्वी सामग्री (Rare Earth Materials) पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए बैटरी विकल्पों के मैन्युफैक्चरिंग की ओर रणनीतिक बदलाव करना चाहिए।
लिथियम-आयन बैटरी के सुरक्षा मुद्दे
चर्चा के दौरान मौजूदा लिथियम-आयन-फॉस्फेट (LFP) बैटरियों के सुरक्षा रिकॉर्ड पर खास चिंता जताई गई। हालांकि ये बैटरियां ग्लोबल EV मार्केट्स में काफी आम हैं, EnerVenue के CEO Henning Rath और HiNa Battery के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन Kun Tang ने सुरक्षा संबंधी बड़ी समस्याओं की ओर इशारा किया। उन्होंने थर्मल रनअवे (Thermal Runaway) की घटना का जिक्र किया, जिसके ग्लोबल डेटा के अनुसार 2025 में 14,000 से अधिक LFP बैटरी में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी, खासकर छोटे सप्लायर्स से, एक महत्वपूर्ण सुरक्षा फैक्टर बनी हुई है।
सोडियम-आयन: भारत के लिए एक किफायती और सुरक्षित विकल्प?
इसके बाद बातचीत भारतीय बाजार के लिए एक संभावित विकल्प के तौर पर सोडियम-आयन (Sodium-Ion) टेक्नोलॉजी की ओर बढ़ी। HiNa Battery के Kun Tang ने बताया कि सोडियम-आयन बैटरियां लिथियम-आयन विकल्पों की तुलना में लगभग दसवें हिस्से की लागत पर तैयार की जा सकती हैं। चूंकि इनमें सोडियम, आयरन और फॉस्फेट जैसी आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग होता है, यह टेक्नोलॉजी भारत को लिथियम से जुड़ी सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर करने में मदद कर सकती है।
2-पहिया और 3-पहिया वाहनों के लिए गेम-चेंजर?
भारतीय बाजार के लिए एक्सपर्ट्स का विश्लेषण बताता है कि सोडियम-आयन टेक्नोलॉजी एक खास जगह बना सकती है। हालांकि वर्तमान में इनकी एनर्जी डेंसिटी (Energy Density) कम है, जो लंबी दूरी तय करने वाली प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के लिए आदर्श नहीं है, लेकिन ये भारत के विशाल 2-पहिया और 3-पहिया सेगमेंट के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं। इन वाहनों को आमतौर पर कम रेंज की आवश्यकता होती है, ऐसे में सोडियम-आयन टेक्नोलॉजी के सुरक्षा और लागत लाभ स्थानीय जरूरतों के लिए बहुत प्रासंगिक हैं।
अन्य बैटरी टेक्नोलॉजीज और भविष्य का रास्ता
चर्चा में निकेल-आधारित (Nickel-based) टेक्नोलॉजी का भी जिक्र हुआ। Henning Rath ने EnerVenue के दृष्टिकोण को पेश किया, जो NASA द्वारा विकसित सिस्टम पर आधारित है। ये बैटरियां आग के जोखिम को कम करने के लिए पानी-आधारित इलेक्ट्रोलाइट्स (Water-based Electrolytes) का उपयोग करती हैं और इन्हें चार्ज साइकिल के लिए डिज़ाइन किया गया है। हालांकि, वर्तमान में यह टेक्नोलॉजी वाहनों को पावर देने के बजाय स्थिर ऊर्जा भंडारण (Stationary Energy Storage) के लिए अनुकूलित है।
एनर्जी ट्रांजिशन स्पेस को ट्रैक करने वाले निवेशक यह देख सकते हैं कि ये टेक्नोलॉजीज रिसर्च लैब से निकलकर कमर्शियल उपयोग में कैसे आती हैं। जबकि सॉलिड-स्टेट बैटरियों (Solid-state Batteries) को अक्सर EV पावर के भविष्य के रूप में देखा जाता है, एक्सपर्ट्स ने उनकी कमर्शियल तैयारी को अभी शुरुआती चरण में माना है। भारत के लिए मुख्य बात यह है कि उसे एक विविध बैटरी केमिस्ट्री (Battery Chemistry) रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें सुरक्षा, लागत और स्थानीय परिवहन की विशिष्ट ऊर्जा आवश्यकताओं को संतुलित किया जा सके। भविष्य की बाजार प्रगति संभवतः इन मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं के स्केल-अप (Scale-up) और घरेलू कंपनियों की मजबूत सप्लाई चेन बनाने की क्षमता पर निर्भर करेगी।
