मंगलवार को Nifty IT Index में **3%** का जोरदार उछाल देखने को मिला। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी लौटने से लार्ज-कैप टेक स्टॉक्स को बड़ा सहारा मिला है। इस सेक्टर के लिए यह साल चुनौतीपूर्ण रहा है, जिसमें अब तक **26%** की गिरावट आ चुकी है, लेकिन यह मौजूदा तेजी बाजार की बदलती चाल का संकेत दे रही है।
IT सेक्टर में क्यों आई तेजी?
मंगलवार को भारतीय IT सेक्टर ने दमदार वापसी की। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर Nifty IT Index 3% बढ़कर 28,100 के स्तर पर पहुंच गया। दिन के दौरान सेक्टरल इंडेक्स में यह सबसे अच्छी परफॉर्मेंस रही। Infosys, Tech Mahindra, Persistent Systems और LTIMindtree जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में 4% तक की तेजी देखी गई। Tata Consultancy Services, HCL Technologies, Mphasis और Coforge के शेयर भी 2% से 3% तक के उछाल के साथ आगे बढ़े।
क्या हैं तेजी के मुख्य कारण?
पिछले चार ट्रेडिंग सेशन से IT इंडेक्स में लगातार 9% का इजाफा हुआ है, जबकि ब्रॉडर Nifty 50 इंडेक्स में सिर्फ 2% की बढ़ोतरी हुई है। बाजार के जानकारों का कहना है कि फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की लगातार बिकवाली के बाद अब नेट बायर्स के तौर पर वापसी ने इस तेजी को बल दिया है। इसके अलावा, ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी और अमेरिकी सेमीकंडक्टर स्टॉक्स के अच्छे प्रदर्शन ने भी वैश्विक टेक सेंटीमेंट को पॉजिटिव किया है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां और भविष्य का संकेत
आज की तेजी के बावजूद, IT सेक्टर अभी भी दबाव में है। साल-दर-साल (YTD) आधार पर Nifty IT Index में 26% की गिरावट है, जबकि Nifty 50 में 6% की गिरावट आई है। मौजूदा मांग का माहौल भी बंटा हुआ दिख रहा है। क्लाइंट्स अब 'आउटकम-बेस्ड' मॉडल्स पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी और क्लाउड मॉडर्नाइजेशन में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं, पारंपरिक और रूटीन IT सर्विसेज पर खर्च कम हो रहा है, जिसका असर बड़ी कंपनियों के ग्रोथ पर पड़ सकता है।
हालांकि, भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार से हायरिंग एक्टिविटी स्थिर बनी हुई है। AI इंटीग्रेशन और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स के मैच्योर होने के साथ बड़ी IT कंपनियों की रिकवरी धीमी रह सकती है। एनालिस्ट्स का मानना है कि मिड-कैप IT कंपनियां तेजी से बदलावों के अनुकूल ढलने और खास सर्विस एरिया पर फोकस करने के कारण बेहतर स्थिति में रह सकती हैं। वहीं, बड़ी कंपनियों को नए टेक्नोलॉजी स्टैक्स की ओर बढ़ते हुए जटिल वैश्विक मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल से निपटना होगा। शेयरधारकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि क्या AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में हालिया डील्स बेहतर प्रॉफिट मार्जिन और सस्टेन्ड रेवेन्यू ग्रोथ में बदल पाती हैं।
