साल 2026 की पहली छमाही में Nifty IT इंडेक्स **31%** गिर गया, जो 2001 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के चलते टेक्नोलॉजी खर्चों में बदलाव और मांग में कमी की आशंकाओं से निवेशक चिंतित हैं। इसी चिंता के चलते Wipro के अमेरिकी शेयरों में भी बड़ी गिरावट आई है।
IT सेक्टर में भारी गिरावट
साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) में Nifty IT इंडेक्स ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। यह इंडेक्स 31% लुढ़क गया, जो कि 2001 के बाद किसी भी कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही में सबसे खराब प्रदर्शन है। 2001 में इस इंडेक्स ने 44% की गिरावट दर्ज की थी। यह लगातार गिरावट IT सर्विस बिजनेस मॉडल को लेकर बढ़ती निवेशक चिंता को दर्शाती है। इस चिंता का मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से एकीकरण है, जो IT कंपनियों को अपनी सर्विस और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी बदलने पर मजबूर कर रहा है, जिससे मार्जिन पर दबाव का डर बढ़ गया है।
Wipro और मार्केट सेंटीमेंट
इस सेक्टर-व्यापी चिंता के बीच, Wipro के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीप्ट्स (ADRs) में बुधवार को 13% से ज़्यादा की गिरावट आई। यह गिरावट निवेशकों की कंपनी के निकट भविष्य के कमाई के अनुमानों को लेकर चिंता को जाहिर करती है। जैसे-जैसे यह सेक्टर AI-आधारित सेवाओं की ओर बढ़ रहा है, बाजार इस बात पर बारीकी से नजर रखे हुए है कि स्थापित IT कंपनियां कैसे अपनी प्राइसिंग और क्लाइंट रिटेंशन को बदलते टेक्नोलॉजी माहौल में बनाए रखती हैं।
अन्य मार्केट संकेत
IT सेक्टर में भारी बिकवाली के बावजूद, अन्य मार्केट इंडिकेटर्स में मिले-जुले संकेत दिखे। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.32% मजबूत होकर 94.93 पर खुला, जो पिछले सत्र के 95.25 के स्तर से एक रिकवरी है। वहीं, सोना और चांदी की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई, लेकिन वे हाल के एक-सप्ताह के उच्च स्तरों के करीब बने हुए हैं। निवेशक आगामी अमेरिकी एम्प्लॉयमेंट डेटा, विशेष रूप से नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह डेटा फेडरल रिजर्व के भविष्य के ब्याज दर निर्णयों को प्रभावित कर सकता है।
बैंकों के अपडेट्स और ट्रेड पॉलिसी
टेक्नोलॉजी सेक्टर से अलग, बैंकिंग स्पेस बुधवार को मार्केट बंद होने के बाद कैनरा बैंक और साउथ इंडियन बैंक जैसे बैंकों द्वारा जारी किए गए प्रोविजनल Q1 बिजनेस अपडेट्स के बाद फोकस में है। निवेशक वर्तमान में लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी के संकेतों के लिए इन अपडेट्स का विश्लेषण कर रहे हैं। ट्रेड पॉलिसी के मोर्चे पर, भारतीय सरकार ने इंडिया-यूएई ट्रेड डील के तहत सोने के आयात के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) प्राधिकरणों की वैधता को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है, जिससे आयातकों को 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने मौजूदा लाइसेंस का उपयोग करने के लिए अधिक समय मिल गया है।
निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?
निकट भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि IT कंपनियां अपनी आगामी अर्निंग रिपोर्ट्स के दौरान AI-संबंधित प्राइसिंग दबावों से कैसे निपटती हैं। इसके अतिरिक्त, अमेरिका से मैक्रोइकोनॉमिक डेटा, जैसे कि रोजगार और मुद्रास्फीति के आंकड़े, रुपये और करेंसी मार्केट की अस्थिरता को प्रभावित करना जारी रखेंगे। बैंक शेयरों के लिए, फोकस नए फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही के लिए जारी किए गए प्रोविजनल बिजनेस के आंकड़ों की गुणवत्ता पर बना हुआ है।
