सितंबर महीने में Nifty IT इंडेक्स में **7%** की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती पैठ और पुरानी सॉफ्टवेयर सर्विसेज की घटती डिमांड के चलते निवेशकों में घबराहट का माहौल है।
क्या है गिरावट की असली वजह?
IT सेक्टर के लिए साल 2026 काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इंडेक्स साल-दर-साल आधार पर 24-25% तक गिर चुका है। मुख्य समस्या यह है कि OpenAI, Anthropic और Google जैसे दिग्गज अब ऐसे AI मॉडल लेकर आ रहे हैं, जो कोडिंग और टेस्टिंग जैसे काम चुटकियों में कर सकते हैं। इसके चलते इंडियन IT कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
क्लाइंट्स की बदलती डिमांड
अब तक भारतीय IT कंपनियां 'मैन-पावर' के जरिए बिलिंग करती थीं, लेकिन AI के आने से यह मॉडल कमजोर पड़ रहा है। क्लाइंट्स अब एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे कंपनियों को अपनी सर्विस की कीमतें घटानी पड़ सकती हैं। इस 'रेवेन्यू कैनिबलाइजेशन' (Revenue Cannibalization) के डर से स्टॉक वैल्युएशन पर भारी दबाव है।
ब्रोकरेज की बदली चाल
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म्स अब इस सेक्टर को लेकर काफी सतर्क हो गई हैं:
- UBS: UBS ने Tech Mahindra को 'Buy' रेटिंग दी है, जबकि HCLTech और Persistent Systems को 'Neutral' कर दिया है।
- CLSA: इन्होंने Tata Consultancy Services, Infosys और Tech Mahindra को 'Hold' रेटिंग दी है। वहीं, Wipro और Mphasis को 'Underperform' की कैटेगरी में डाला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जो कंपनियां जल्द से जल्द AI-आधारित कंसल्टिंग और इंटीग्रेशन में अपनी पकड़ बनाएंगी, वही इस दौर में टिक पाएंगी। निवेशकों की नजर अब इस पर है कि ये कंपनियां कैसे अपने प्रॉफिट मार्जिन को बचाए रखती हैं।
