Nielsen CTO: AI से विज्ञापन मापन में क्रांति, रियल-टाइम ROI की ओर बढ़ता मार्केट

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AuthorMehul Desai|Published at:
Nielsen CTO: AI से विज्ञापन मापन में क्रांति, रियल-टाइम ROI की ओर बढ़ता मार्केट

Nielsen के CTO अनिल गोयल का कहना है कि AI विज्ञापनों को 'देर से मिलने वाली रिपोर्ट्स' से 'रियल-टाइम परफॉरमेंस ट्रैकिंग' की ओर ले जा रहा है। जैसे-जैसे भारत का विज्ञापन मार्केट **₹1.64 लाख करोड़** तक पहुंचने वाला है, टीवी, OTT और डिजिटल पर एकीकृत डेटा (Unified Data) जरूरी हो गया है। इसका लक्ष्य विज्ञापनदाताओं को खर्च को सीधे बिक्री जैसे बिजनेस आउटकम से जोड़ने में मदद करना है, न कि सिर्फ ऑडियंस रीच तक सीमित रखना।

AI से विज्ञापन की इकोनॉमी में बड़ा बदलाव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब विज्ञापन की इकोनॉमी को पूरी तरह से बदल रहा है। इसकी मदद से रियल-टाइम में ऑडियंस को मापना और कैंपेन को ट्रैक करना संभव हो रहा है। Nielsen के CTO अनिल गोयल ने हाल ही में कहा कि इंडस्ट्री अब पुराने, पीछे मुड़कर देखने वाले विश्लेषणों से आगे बढ़ रही है। अब कंपनियां तुरंत ऐसे इनसाइट्स चाहती हैं जो उन्हें कैंपेन के दौरान ही अपने विज्ञापन खर्च को ऑप्टिमाइज़ करने की सुविधा दें, बजाय इसके कि बजट खर्च होने के बाद परफॉरमेंस का मूल्यांकन किया जाए।

इंटीग्रेटेड डेटा की ओर बढ़ता कदम

मीडिया के बढ़ते बिखराव (Fragmentation) के कारण यह बदलाव लाया जा रहा है। आज के समय में उपभोक्ता लगातार टेलीविजन, OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और अलग-अलग मोबाइल डिवाइस के बीच स्विच करते रहते हैं। Nielsen अपनी टेक्नोलॉजी में मशीन लर्निंग पर फोकस कर रहा है ताकि इन बिखरे हुए डेटा सोर्स को एक साथ लाया जा सके। मल्टी-स्क्रीन पर उपभोक्ता कंटेंट के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं, इसका एक डी-डुप्लिकेटेड व्यू बनाकर, कंपनी उन विज्ञापनदाताओं के लिए एक स्पष्ट तस्वीर पेश करने का लक्ष्य रखती है जो विभिन्न चैनलों पर असंगत मापन मेट्रिक्स से जूझते हैं।

विज्ञापनों को बिजनेस नतीजों से जोड़ना

सिर्फ ऑडियंस रीच से आगे बढ़कर, अब ब्रांड्स ठोस बिजनेस नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। विज्ञापनदाता लगातार यह पूछ रहे हैं कि विज्ञापन का प्रभाव ग्राहक अधिग्रहण (Customer Acquisition) और वास्तविक बिक्री के आंकड़ों में कैसे बदलता है। Nielsen की 2025 एनुअल मार्केटिंग रिपोर्ट के अनुसार, केवल 32% मार्केटर्स वर्तमान में डिजिटल और पारंपरिक मीडिया को एकीकृत तरीके से मापते हैं। यह इंडस्ट्री में एक बड़ी कमी को उजागर करता है जिसे AI-संचालित टूल भरने की कोशिश कर रहे हैं। बड़े बजट वाले विज्ञापनदाताओं के लिए, ये टूल पर्सनलाइजेशन और कैंपेन एफिशिएंसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।

ग्रोथ और भविष्य की चुनौतियां

भारतीय विज्ञापन बाजार के 2025 तक ₹1.64 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें डिजिटल मीडिया वर्तमान में कुल राजस्व का लगभग 60% है। जैसे-जैसे Gen Z दर्शक कई डिवाइस पर शॉर्ट-फॉर्म वीडियो और क्रिएटर-लेड कंटेंट को पसंद करना जारी रखेंगे, मापन की जटिलता बढ़ने की संभावना है।

हालांकि AI बेहतर एफिशिएंसी की क्षमता प्रदान करता है, इंडस्ट्री को अभी भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। मार्केटर्स को नए, स्वचालित टूल अपनाने की आवश्यकता और यह सुनिश्चित करने के लिए सटीक, स्वतंत्र डेटा की आवश्यकता के बीच संतुलन बनाना होगा कि कैंपेन प्रभावी बने रहें। मीडिया और विज्ञापन क्षेत्र में निवेशकों और हितधारकों के लिए अगला महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल यह होगा कि एजेंसियां और ब्रांड इन AI-संचालित क्रॉस-प्लेटफ़ॉर्म टूल को सीधे रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) साबित करने के लिए कितनी जल्दी सफलतापूर्वक एकीकृत कर पाते हैं, खासकर डिजिटल विज्ञापन स्पेस में प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.