Nexperia vs Wingtech: पैरेंट कंपनी के खिलाफ डच कोर्ट पहुंची Nexperia, पावर स्ट्रगल से बढ़ी टेंशन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Nexperia vs Wingtech: पैरेंट कंपनी के खिलाफ डच कोर्ट पहुंची Nexperia, पावर स्ट्रगल से बढ़ी टेंशन

नीदरलैंड्स की चिपमेकर कंपनी Nexperia ने अपनी चीनी पैरेंट कंपनी Wingtech Technology के खिलाफ कानूनी लड़ाई छेड़ दी है। कंपनी ने बिजनेस को भारी नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है, जिससे ग्लोबल सेमीकंडक्टर ऑपरेशंस पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

नीदरलैंड्स स्थित सेमीकंडक्टर निर्माता Nexperia ने अपनी चीनी पैरेंट कंपनी Wingtech Technology और इसके फाउंडर Zhang Xuezheng के खिलाफ डच अदालत में कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। यह विवाद अक्टूबर 2025 से चल रहे कॉर्पोरेट गवर्नेंस के झगड़े का एक बड़ा मोड़ है। Nexperia का कहना है कि मैनेजमेंट के फैसलों और कंट्रोल को लेकर हुए विवाद से कंपनी को भारी वित्तीय और ऑपरेशनल नुकसान हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय विवाद का लंबा इतिहास

यह कानूनी लड़ाई एक जटिल अंतरराष्ट्रीय स्टैंडऑफ का हिस्सा है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब डच अधिकारियों ने कुप्रबंधन और एसेट ट्रांसफर को लेकर चिंता जताई, जिसके बाद कंपनी की लीडरशिप स्ट्रक्चर में दखल देना पड़ा। इस पर पलटवार करते हुए Wingtech Technology ने मई 2026 में चीन में Nexperia के खिलाफ 8 अरब युआन (लगभग $1.1 बिलियन) के हर्जाने का दावा ठोक दिया था। कंपनी का तर्क है कि डच रेगुलेशन और आंतरिक दखलअंदाजी पक्षपाती है और चीन के 'एंटी-फॉरेन सैंक्शंस लॉ' का उल्लंघन करती है।

फाइनेंशियल और ऑपरेशनल जोखिम

इस लड़ाई का असर Nexperia की आर्थिक स्थिति पर साफ दिख रहा है। अगस्त 2026 में, एक चीनी कोर्ट ने चीन में स्थित Nexperia की लगभग 2.14 अरब युआन (करीब $300 मिलियन) की संपत्ति को फ्रीज करने का आदेश दिया। यह फ्रीज 2029 तक प्रभावी रह सकता है, जो कंपनी की लिक्विडिटी और फंड मैनेजमेंट के लिए एक बड़ी बाधा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स को डर है कि यह कानूनी लड़ाई लीडरशिप का ध्यान भटका सकती है और भविष्य में प्रोडक्ट लॉन्च में देरी के साथ-साथ सप्लाई चेन को बाधित कर सकती है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर संवेदनशील होने के कारण यह कंपनी अब अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनावों के बीच फंस गई है। डच अदालत में चल रहे इस नए केस के नतीजों पर दुनिया भर के निवेशकों की नजरें टिकी हैं। फिलहाल, कंपनी की स्थिरता और ग्लोबल ऑपरेशंस की निरंतरता बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.