भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2027-31 के लिए ₹62,500 करोड़ की नई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) लॉन्च की है, जो मौजूदा PLI प्रोग्राम की जगह लेगी। इस कदम का मकसद घरेलू कंपोनेंट सोर्सिंग बढ़ाना और लोकल ब्रांड्स को सपोर्ट करना है। इसका असर Dixon Technologies, Syrma SGS और Kaynes Technology जैसे स्टॉक्स पर दिखा है। यह नई पॉलिसी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
नई MPMS स्कीम का असर
गुरुवार को भारत की प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। इसकी वजह सरकार की ओर से मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए ₹62,500 करोड़ की नई इंसेंटिव स्कीम का ऐलान है। इस स्कीम को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) नाम दिया गया है और यह वित्त वर्ष 2027 से 2031 तक लागू रहेगी। यह मौजूदा प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) फ्रेमवर्क की जगह लेगी।
MPMS स्ट्रक्चर का प्रभाव
सरकार ने MPMS को इस तरह डिज़ाइन किया है कि भारत में बने मोबाइल फोन की बिक्री पर 2.25% से 5% तक का इंसेंटिव मिलेगा। निवेशकों के लिए एक खास बात यह है कि लोकल कंपोनेंट्स और सब-असेंबली की सोर्सिंग के लिए 1.5% अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान है। इसके अलावा, जो कंपनियां अपने भारतीय मोबाइल ब्रांड की स्थापना और निर्माण के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) करती हैं, वे 3% इंसेंटिव का लाभ उठा सकती हैं। इन प्रावधानों का मकसद इंडस्ट्री को सिर्फ असेंबली से आगे ले जाकर वैल्यू एडिशन की ओर बढ़ाना है, ताकि इंपोर्टेड पार्ट्स पर निर्भरता कम हो सके।
फाइनेंशियल पहलू और मार्जिन की उम्मीद
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और एनालिस्ट्स का मानना है कि यह पॉलिसी EMS कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पिछली PLI स्कीम में, कई मैन्युफैक्चरर्स इंसेंटिव का एक बड़ा हिस्सा अपने ग्राहकों को पास कर देते थे, जिससे उनके खुद के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ता था। नई स्कीम में डोमेस्टिक कंपोनेंट सोर्सिंग पर जोर देने से कंपनियों के मार्जिन को बेहतर सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स ने Dixon Technologies जैसी कंपनियों को इसका खास फायदा उठाने वाला बताया है, क्योंकि यह इंसेंटिव स्ट्रक्चर मार्जिन प्रेशर और कस्टमर रिटेंशन से जुड़ी चिंताओं को कम कर सकता है।
इंडस्ट्री परफॉर्मेंस और मार्केट रिएक्शन
इस ऐलान के बाद सेक्टर में मार्केट का रिएक्शन पॉजिटिव रहा। Dixon Technologies (India) Ltd ने 6.1% की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा फायदा उठाया, जबकि Kaynes Technology India Ltd, Amber Enterprises India Ltd, और Syrma SGS Technology Ltd में क्रमशः 3%, 2% और 1.5% की तेजी दर्ज की गई। इन स्टॉक्स ने बेंचमार्क निफ्टी 50 को पीछे छोड़ दिया, जो इस दौरान ज्यादातर सपाट रहा। हालांकि, अभी सेक्टर का लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस स्कीम के वास्तविक अमल की रफ्तार और इंडस्ट्री की एक मजबूत डोमेस्टिक सप्लाई चेन विकसित करने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
सेक्टर की चुनौतियां और आगे क्या?
वॉल्यूम के हिसाब से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर बन गया है, और लगभग सभी फोन यहीं असेंबल होते हैं। हालांकि, वैल्यू चेन में ऊपर जाना अभी भी एक चुनौती है। सरकार का बाहरी सप्लाई चेन, खासकर चीन से इंपोर्ट होने वाले कंपोनेंट्स पर निर्भरता कम करने का जोर एक महत्वपूर्ण स्ट्रेटेजिक लक्ष्य है। निवेशकों को MPMS के अमल की समय-सीमा, मैन्युफैक्चरिंग फर्मों द्वारा इसे अपनाने की दर और अगले पांच सालों में इंडस्ट्री द्वारा ₹39 ट्रिलियन के प्रोडक्शन के लक्ष्य को हासिल करने पर नजर रखनी चाहिए।
