वैज्ञानिकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके एक नया आयरन-निकल डुअल-एटम कैटेलिस्ट (dual-atom catalyst) खोज निकाला है, जो लिथियम-सल्फर (Li-S) बैटरी की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाता है। यह खोज हाई-एनर्जी-डेंसिटी वाली इन बैटरियों को अपनाने में आ रही सल्फर लीकेज और धीमी चार्जिंग जैसी समस्याओं को दूर कर सकती है।
Detailed Coverage
लिथियम-सल्फर बैटरी की केमिस्ट्री में बाधाएं
लिथियम-सल्फर (Li-S) बैटरी में पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी की तुलना में 5 गुना तक ज्यादा एनर्जी स्टोर करने की क्षमता है, और यह सस्ती सामग्री से बनती हैं। लेकिन, सल्फर का लीक होना (sulphur leakage) और चार्जिंग-डिस्चार्जिंग का धीमा होना जैसी दिक्कतों के चलते इनका कमर्शियल इस्तेमाल सीमित है। बैटरी के चलने पर सल्फर ऐसे रूपों में बदल जाता है जो इलेक्ट्रोलाइट में घुल जाते हैं और इलेक्ट्रोड के बीच फैल जाते हैं, जिससे बैटरी की पावर कैपेसिटी स्थायी रूप से कम हो जाती है। साथ ही, सॉलिड सल्फर कंपाउंड का बनना चार्जिंग प्रक्रिया को काफी धीमा कर देता है। पहले, ग्राफीन पर सिंगल-एटम मेटल कैटेलिस्ट का इस्तेमाल किया जाता था, पर वे समय के साथ परफॉर्मेंस बनाए रखने में संघर्ष करते थे।
AI से मिली दमदार कैटेलिस्ट
इन दिक्कतों से निपटने के लिए, Sahil Kumar जैसे वैज्ञानिकों की एक टीम ने डुअल-एटम कैटेलिस्ट (DACs) का इस्तेमाल किया। दो मेटल एटम को एक साथ रखकर, ये कैटेलिस्ट घुले हुए सल्फर मॉलिक्यूल्स को रोकने में ज्यादा असरदार साबित होते हैं, और साथ ही जरूरी केमिकल रिएक्शन्स को भी आसान बनाते हैं। हजारों संभावित मेटल कॉम्बिनेशन में से सबसे प्रभावी जोड़ी खोजने के लिए, टीम ने PACE (Precise and Accelerated Configuration Evaluation) नामक AI टूल का इस्तेमाल किया। इस सिस्टम ने 46,000 से ज्यादा स्ट्रक्चरल कॉन्फ़िगरेशन को वर्चुअल स्क्रीनिंग करके सबसे एफिशिएंट पेयरिंग की पहचान की।
आयरन-निकल का गेमचेंजर रोल
AI एनालिसिस से पता चला कि आयरन-निकल (Iron-Nickel) कॉम्बिनेशन बाइंडिंग स्ट्रेंथ (binding strength) को बैलेंस करने के लिए सबसे अच्छा है। यह पेयरिंग सल्फर को लीक होने से रोकने के लिए काफी मजबूत है, लेकिन केमिकल कन्वर्जन को तेजी से होने देने के लिए काफी फ्लेक्सिबल भी है। इससे बैटरी वेस्ट को चार्जिंग के दौरान तोड़ने के लिए कम एनर्जी की जरूरत पड़ती है, जो ओवरऑल चार्जिंग स्पीड बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण फैक्टर है। टीम ने भविष्य के मेटल पेयरिंग्स की एफिशिएंसी का अनुमान लगाने के लिए एक मशीन-लर्निंग मॉडल भी डेवलप किया है, जिससे एनर्जी स्टोरेज सेक्टर में रिसर्च की रफ़्तार तेज़ हो सकती है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
यह रिसर्च मैटेरियल साइंस में एक बड़ा कदम है, लेकिन यह अभी लैब स्टेज पर है। निवेशकों और इंडस्ट्री पर नज़र रखने वालों के लिए, कमर्शियल होने का रास्ता इन डुअल-एटम कैटेलिस्ट की स्केलेबिलिटी (scalability) और बड़े पैमाने पर किफायती उत्पादन की क्षमता पर निर्भर करेगा। भविष्य में, रिसर्च संस्थानों और बैटरी निर्माताओं के बीच संभावित पार्टनरशिप, लैब-स्केल साइकिल लाइफ टेस्टिंग में प्रगति, और पायलट-स्केल प्रोडक्शन की ओर बढ़ते कदम देखने लायक होंगे। इन क्षेत्रों में सफलता, पारंपरिक लिथियम-आयन बैटरी मार्केट के लिए एक प्रतिस्पर्धी विकल्प पेश कर सकती है, जो पहले से ही लिथियम और कोबाल्ट की उपलब्धता को लेकर सप्लाई चेन के दबाव का सामना कर रहा है।
